India Operation Sindoor : भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को अपने-अपने परमाणु ठिकानों की सूची एक-दूसरे को सौंपी दी है। ये कदम द्विपक्षीय समझौते के तहत किया गया है, जो दोनों देशों को अपने परमाणु ठिकानों पर हमला करने से रोकता है। ये प्रैक्टिस पिछले तीन दशकों से जनवरी में होती आ रही है और इस बार इसे 35वीं बार शेयर किया गया है। पहली बार न्यूक्लियर ठिकानों की ये लिस्ट 1 जनवरी, 1995 को साझा की गई थी।
भारत पाकिस्तान ने शेयर की न्यूक्लियर ठिकानों की लिस्ट
साल 2025 के मई में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इन कठिन समय में दोनों देशों के बीच परमाणु ठिकानों की लिस्ट का आदान-प्रदान ऐतिहासिक महत्व रखता है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और पाकिस्तान ने आज नई दिल्ली और इस्लामाबाद में डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए अपने-अपने न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी की सूची शेयर की है।
35वीं बार दोनों देशों ने सौंपी परमाणु ठिकानों के लिस्ट
बता दें कि दोनों देशों के बीच परमाणु ठिकानों के लिस्ट की शेयरिंग उस समझौते के तहत है, जो 31 दिसंबर, 1988 को हस्ताक्षरित हुआ था और 27 जनवरी, 1991 से लागू है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने अपने-अपने परमाणु स्थलों की लिस्ट 35वीं बार एक-दूसरे से शेयर की है। पहली बार में ये लिस्ट 1 जनवरी, 1995 को साझा की गई थी। इसके अलावा, इस बार दोनों देशों ने द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने-अपने कैदियों और मछुआरों की भी लिस्टें साझा की हैं।
दोनों देशों ने क्या-क्या शेयर किया?
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि भारत ने अपनी कस्टडी में 391 सिविल कैदियों और 33 मछुआरों का विवरण पाकिस्तान के साथ साझा किया है, जबकि पाकिस्तान ने अपनी कस्टडी में 58 भारतीय कैदियों और 199 मछुआरों का विवरण भारतीय अधिकारियों को सौंपा है। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत ने पाकिस्तान की कस्टडी में बंद भारतीय कैदियों, मछुआरों, उनकी नावों और लापता भारतीय डिफेंस कर्मियों को जल्द रिहा करने और वापस भेजने की मांग की है। इसके साथ ही, पाकिस्तान से 167 भारतीय मछुआरों और कैदियों की रिहाई और वापसी में तेजी लाने का आग्रह भी किया गया है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
ऑपरेशन सिंदूर से चल रहा पाक से भारत का तनाव
गौरतलब है कि पहलगाम में आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के संबंधों में भारी तनाव आया था। इन घटनाओं के बाद भारत ने अपने डिप्लोमैटिक और स्ट्रेटेजिक कदम उठाए हैं, जिनमें से एक इंडस वाटर्स ट्रीटी (IWT) में हिस्सा लेने पर रोक लगाना भी है। ये 1960 का एक अहम समझौता था, जिसे वर्ल्ड बैंक ने करवाया था।
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