नई दिल्ली में आयोजित दूसरी ‘इंडिया-अरब फॉरेन मिनिस्टर्स मीटिंग’ में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया के बदलते स्वरूप पर गंभीर मंथन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट में हो रहा वैश्विक व्यवस्था का बदलाव सीधे तौर पर भारत को प्रभावित करता है। जयशंकर के अनुसार, India-Arab Relations अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा के स्तर पर नए आयाम छू रहे हैं।
वैश्विक बदलाव का केंद्र बना मिडिल ईस्ट
विदेश मंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था राजनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक के कारण बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। इस बदलाव का सबसे गहरा असर पश्चिम एशिया या मिडिल ईस्ट में देखने को मिल रहा है। पिछले एक साल में इस क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। भारत एक निकटतम पड़ोसी क्षेत्र होने के नाते इन परिवर्तनों से अछूता नहीं रह सकता।
गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय चुनौतियां
जयशंकर ने गाजा की स्थिति को विश्व राजनीति का केंद्र बिंदु बताया। उन्होंने नवंबर 2025 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 का जिक्र करते हुए कहा कि गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक व्यापक शांति योजना अब वैश्विक प्राथमिकता बन चुकी है। इसके अलावा, उन्होंने सूडान में जारी आंतरिक संघर्ष पर भी चिंता व्यक्त की, जो वहां के समाज पर गहरा असर डाल रहा है।
समुद्री सुरक्षा और भारतीय सैनिकों की भूमिका
भारत की क्षेत्रीय चिंताओं में यमन और लेबनान का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल रहा। यमन के हालातों का सीधा असर समुद्री नौवहन (maritime navigation) की सुरक्षा पर पड़ता है, जो भारत के व्यापारिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, लेबनान में ‘यूनिफिल’ (UNIFIL) मिशन के तहत भारतीय सैनिक तैनात हैं। विदेश मंत्री ने लीबिया में राष्ट्रीय संवाद प्रक्रिया और सीरिया की स्थिरता को भी क्षेत्र की भलाई के लिए आवश्यक बताया।
आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’
भारत और अरब देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा आधार आतंकवाद का मुकाबला करना है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से पीड़ित समाजों को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस वैश्विक खतरे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को एक अनिवार्य वैश्विक कानून बनाना चाहिए।
India-Arab Relations: साझेदारी के नए आयाम
भारत और अरब लीग (LAS) के देशों के बीच संबंध अब ऐतिहासिक व्यापार से आगे बढ़कर रणनीतिक स्तर पर पहुंच गए हैं। इस क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय रहता है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करता है। ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत और अरब देश एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं।
भविष्य का एजेंडा: 2026-28 की योजना
बैठक के दौरान वर्ष 2026-28 के लिए सहयोग के एजेंडे पर भी चर्चा हुई। इसमें पारंपरिक क्षेत्रों जैसे ऊर्जा, कृषि और पर्यटन के साथ-साथ आधुनिक क्षेत्रों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। भारत चाहता है कि भविष्य की साझेदारी में डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष (Space), स्टार्टअप्स और इनोवेशन को प्राथमिकता दी जाए। हाल ही में ‘इंडिया-अरब चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर’ की शुरुआत इस दिशा में एक बड़ा कदम है।
विदेश मंत्री ने विश्वास जताया कि यह चर्चा परिणामोन्मुखी होगी। भारत ने पिछले दशक में अपनी तकनीकी क्षमताओं और जन-केंद्रित अनुप्रयोगों में जो प्रगति की है, वह उसे अरब देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बैठक से इतर अरब देशों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर संबंधों की गहराई को रेखांकित किया।
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