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देश की अदालतों में 5.5 करोड़ केस पेंडिंग: ‘तारीख पर तारीख’ का अंत कब? CJI सूर्यकांत ने बताई सच्चाई

सुप्रीम कोर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान CJI सूर्यकांत लंबित मामलों और न्याय व्यवस्था की चुनौतियों पर बोलते हुए

CJI सूर्यकांत ने बताया—5.5 करोड़ लंबित केस क्यों चिंता बढ़ा रहे हैं

भारतीय न्यायपालिका पर बोझ इतना बढ़ गया है कि सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालतों तक 5 करोड़ 49 लाख से ज्यादा मामले लंबित पड़े हैं। (India Court Backlog Crisis) ये आंकड़े 8 दिसंबर 2025 तक के हैं, जो NJDG (National Judicial Data Grid) से लिए गए हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने इसे सबसे बड़ी चुनौती बताया है। (CJI Sanjiv Khanna Successor Challenge) कई पीढ़ियां गुजर जाती हैं, लेकिन केस निपटते नहीं। आइए जानते हैं इस बैकलॉग की पूरी डिटेल

निचली अदालतों पर सबसे ज्यादा दबाव

कुल 5 करोड़ 49 लाख से ज्यादा केसों में से ज्यादातर निचली अदालतों में अटके हैं। (Supreme Court Pending Cases)

ये आंकड़े दिखाते हैं कि ज्यादातर विवाद जिला स्तर पर ही अटक जाते हैं, जहां संसाधनों की कमी सबसे ज्यादा है।

साल दर साल बढ़ता बोझ, 2016 से ही अलार्मलंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। (Historical Court Pendency India) 2016 में स्टडी दक्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में केस निपटाने में औसतन 13 साल लग सकते हैं। तब से स्थिति और बिगड़ी है। CJI सूर्यकांत ने कहा, “देश में 5 करोड़ से ज्यादा लंबित केस न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं।” (CJI Suryakant Statement) कई बार तो लोगों की उम्र खत्म हो जाती है, मुकदमा नहीं। ये ट्रेंड 1980s से चला आ रहा, जब लॉ कमीशन ने चेतावनी दी थी।

जजों की कमी से वकीलों की तलाश तकइस पहाड़ के पीछे कई वजहें हैं। (Reasons for Judicial Backlog India)

सरकार और न्यायपालिका की पहलें: मीडिएशन को ‘गेम चेंजर’

CJI सूर्यकांत ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं।

‘न्याय मिलना ही काफी नहीं, समय पर मिलना चाहिए’

CJI सूर्यकांत ने जोर दिया कि न्याय में देरी न्याय का हनन है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटलीकरण (e-Courts) और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) से ही राहत मिलेगी। लेकिन बिना जजों की संख्या बढ़ाए ये सपना अधूरा है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर यही रफ्तार रही, तो बैकलॉग 6 करोड़ को पार कर जाएगा। (F

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