आयकर विभाग में स्पष्ट बताया कि अब वह केवल टैक्स संग्रह करने वाली संस्था नहीं है बल्कि Income Tax की प्रणाली को अधिक पारदर्शी डिजिटल और टैक्स डाटा अनुकूल बनाने पर लगातार काम करती जा रही है। आयकर दिवस के अवसर पर मुख्य आयुक्त ने बताया कि विभाग आधुनिक तकनीक के द्वारा सेवाओं में सुधार करने की कोशिश कर रहा है। जिससे रिटर्न फाइलिंग रिफंड और शिकायत निवारण की प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान हो गई है। इसका सीधा लाभ लाखों टैक्स देने वाले लोगों और देश की टैक्स अनुपालन व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है।
Income Tax प्रणाली में तकनीक का बढ़ता हुआ उपयोग
आयकर विभाग में हाल ही में सालों में डिजिटल प्लेटफार्म में कई सारे सुधार किए हैं। ई-फाइलिंग पोर्टल ऑनलाइन नोटिस फेसलेस असेसमेंट और तेज रिफंड गैस सुविधाओं ने टेक्स्ट देने वाले लोगों के प्रक्रिया को और भी सरल बना दिया है। विभाग का कहना है की तकनीक के उपयोग से प्रदर्शित बढ़ती जा रही है और मानवीय हस्तचेप कम होने से विवादों में भी कमी आईहै।
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स्वैच्छिक टैक्स अनुपालन में दर्ज हुई है बढ़ोतरी
अधिकारियों के द्वारा दी जाने वाली जानकारी के अनुसार Income Tax डिजिटल सेवाओं और आसान प्रक्रिया के कारण अधिक लोगों स्वेच्छा से अपने आयकर रिटर्न दाखिल कर रहेहैं। स्टॉक एक्सचेंज डाटा ही नहीं बल्कि आयकर विभाग के ऑफिशियल आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ सालों में रिटर्न फाइल करने वाले टैक्स के लोग की संख्या और प्रत्यक्ष टैक्स संग्रह करने वाले लोगों दोनों में ही लगातार वृद्धि हो रही है। इससे सरकार के राजस्व आधार को मजबूती मिलती हुई दिखाई दे रही है।
ईमानदार करदाताओं को राहत देने पर होगा फोकस
कंपनी के ऑफिशियल बयान की तरह विभाग ने अपने संदेश में बताया कि ईमानदार टैक्स देने वाले लोगों को बेहतर शिवाय देना आयकर विभाग की सबसे पहले प्राथमिकताएं हैं। विभाग का उद्देश्य है कि वास्तविक गलतियां और जानबूझकर की गई चोरी के मामलों में स्पष्ट अंतर करना है ताकि अनुपालन करने वाले टैक्स के लोग को बिना जरूरत की परेशानी का सामना न करना पड़े। विश्लेषकों की जानकारी के अनुसार टैक्स देने वाले लोगों को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने से टैक्स स्पेस बढ़ाने में मदद मिल रही है। इससे टैक्स देने वाले लोगों का भरोसा मजबूत होगा और सरकार को आने वाले समय में स्थिर राजस्व प्राप्त हो पाएगा।
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करदाताओं और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा इसका असर
बाजार की विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल Income Tax प्रणाली से अनुपात लागत घटती है और टैक्स से जुड़े काम में समय की बचत भी होगी। तेज रिफंड ऑनलाइन शिकायत के निवारण और फेसलेस प्रक्रियाओं के लाभ व्यक्तिगत टैक्स देने वाले लोगों के साथ-साथ व्यवसाय को भी मिलने लगेंगे। हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि डिजिटल सेवाओं के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और डाटा की गोपनीयता पर लगातार ध्यान देना बहुत जरूरीहै। आगे भी आयकर विभाग तकनीकी आधारित सुधारो को जारी रखने की योजना पर काम करने वाला है। इससे टैक्स देने वाले लोगों को टैक्स प्रशासन अधिक कुशल लगने की उम्मीदहै। हालांकि भविष्य के परिणाम आने वाले फैसले और टैक्स देने वाले लोगों की भागीदारी पर ही निर्भर करेंगे।

