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IAEA Alert: Middle East Nuclear Risk होने से वैश्विक बाजार है चिंतित

IAEA Alert: Global markets worried about Middle East nuclear riskIAEA Alert: Global markets worried about Middle East nuclear risk

IAEA Alert: Global markets worried about Middle East nuclear risk

IAEA Alert: Middle East Nuclear Risk को लेकर वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की चेतावनी के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 3% तक का उछाल देखा गया है। यह स्थिति हाल ही के सैन्य तनाव और ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की आशंका के कारण बनी हुई है। जिसका असर अब वैश्विक लेवल पर सप्लाई चैन पर देखने को मिल सकता है।

ऊर्जा बाजार पर भी Middle East Nuclear Risk का होगा असर

IAEA ने संभावित रेडिएशन के रिस्क को लेकर चेतावनी दी है जिससे निवेश करने वाले लोगों की रिस्क धारणा प्रभावित हो रही है। मिडिल ईस्ट न्यूक्लियर रिस्क बढ़ाने की आशंका की बीच ब्रेड क्रूड की कीमत 2.8% से बढ़कर लगभग 89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है जबकि WTI क्रूड भी 2.5% तक मजबूत हुआ है। कमोडिटी मार्केट के निवेशक के अनुसार किसी भी न्यूक्लियर साइट पर हमले की स्थिति में क्षेत्रीय स्थिरता पर असर देखा जा सकता है। जिससे तेल के उत्पादन और निर्यात में बाधा उत्पन्न हो सकती है। मिडिल ईस्ट दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है इसलिए भू राजनीतिक तनाव का सीधा प्रभाव ऊर्जा की कीमतों पर पड़ता दिखेगा।

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निवेशकों की प्रतिक्रिया और सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव

स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार वैश्विक बाजारों में इसके रिस्क परिसंपत्तियों से अंदाज अनुसार निकासी देखी गई है। निवेश करने वाले लोगों ने सोना और अमेरिकी ट्रेजरी जैसे सुरक्षित ऑप्शन की ओर अब अपना ध्यान दिया है। निवेश करने वाले एक्सपोर्ट के अनुसार मिडिल ईस्ट न्यूक्लियर रिस्क के कारण गोल्ड की कीमतों में 1.6% की बढ़त देखी गई है। ऊर्जा कंपनी के शेयर में भी सीमित तेजी देखी गई है साथ ही एयरलाइन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी दबाव बढ़ा है। यह सभी बदलाव वैश्विक लेवल के रिस्क में वृद्धि करने का संकेत देता है।

उभरते बाजारों पर इसके क्या संभावित प्रभाव

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत जैसे तेल आया तक देश पर लगातार इसका लागत दबाव बढ़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों मैं तेजी होने से चालू खाता घाटा बढ़ता देखा जा सकता है मुद्रा स्थिति में दबाव बन सकता है साथ ही रुपए पर इसका अप्रत्यक्ष रूप से असर भी संभव है हालांकि अभी तक किसी भी बड़े आपूर्ति में दिक्कत होने की पुष्टि नहीं हुई है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का क्या है दृष्टिकोण

ऊर्जा बाजार पर मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वर्तमान स्थिति रिस्क आधारित प्रतिक्रिया बताती है ना की वास्तविक सप्लाई शॉक। IAEA के ऑफिशियल बयान में संयम बरतने की अपील की गई है जिससे बाजारों में संभावित घबराहट को सीमित किया जा सकता है ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार अगर सैन्य तनाव इसी प्रकार बढ़ता है तो तेल 95 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है हालांकि अभी तक केवल यह एक अनुमान बताया जा रहा है।

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निवेश करने वाले लोगों के लिए आगे की दिशा

बाजार की अगली चाल मिडल ईस्ट की भू राजनीतिक स्थितिऔर IAEA की रिपोर्ट पर ही निर्भर होगी। निवेश करने वाले लोगों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना हो सकता है हालांकि यह केवल एक जानकारी है निवेश की सलाह नहीं है।

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