Control High Cholesterol : आजकल की लाइफस्टाइल में गलत खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण कोलेस्ट्रॉल बढ़ना एक आम समस्या बनती जा रही है। बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की समस्या तब पता चलती है जब स्थिति गंभीर हो जाती है। हाई कोलेस्ट्रॉल को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है।
कोलेस्ट्रॉल क्या है?
कोलेस्ट्रॉल शरीर में पाया जाने वाला एक वसा (फैट) है, जो हार्मोन बनाने और कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करता है। परंतु जब खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ जाता है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) कम हो जाता है, तो यह हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण क्या हैं?
अक्सर इस स्थिति में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन कुछ संकेतों से इसकी पहचान हो सकती है जैसे:
- जल्दी थकान महसूस होना
- सीने में दर्द या भारीपन
- सांस लेने में कठिनाई
- पैरों या हाथों में झनझनाहट
- चलने पर पैरों में दर्द
- आंखों के आसपास या त्वचा पर पीले रंग के छोटे दाने
- बार-बार सिर दर्द या चक्कर आना
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण क्या हैं?
- तला-भुना और जंक फूड का अधिक सेवन
- जरूरत से ज्यादा घी, मक्खन और तेल का प्रयोग
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- मोटापा
- धूम्रपान और शराब का सेवन
- तनाव और नींद की कमी
- अनुवंशिक कारण
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने के उपाय
1. सही खान-पान अपनाएं
- हरी सब्जियां, फल, और साबुत अनाज अधिक खाएं।
- ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और मल्टीग्रेन रोटी को अपनी डाइट में शामिल करें।
- तला-भुना, फास्ट फूड और बेकरी आइटम कम करें।
- घी और मक्खन की जगह सरसों या ओलिव ऑइल का प्रयोग सीमित मात्रा में करें।
2. रोजाना व्यायाम करें
- कम से कम 30 मिनट तेज चलना, योग, प्राणायाम या साइकिलिंग करें।
- हल्की-फुल्की कसरत भी कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार है।
3. वजन पर नियंत्रण रखें
- अधिक वजन से LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर तेजी से बढ़ता है।
- संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से वजन कम करें।
4. तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें
- तनाव और अनियमित नींद से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
- रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें और खुद को आराम दें।
5. नियमित जांच कराएं
- बिना लक्षण के भी समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना जरूरी है ताकि स्तर का पता चलता रहे।
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