How Persia Become Iran: एक समय था जब दुनिया का सबसे शक्तिशाली और समृद्ध साम्राज्य पर्शिया (Persia) कहा जाता था। आज जिसे हम ईरान (Iran) कहते हैं, वह वही प्राचीन भूमि है, जिसने सदियों तक कला, विज्ञान, दर्शन, साहित्य और साम्राज्य की शान को परिभाषित किया। यह कहानी है उस महान सभ्यता की, जो धीरे-धीरे बदलती गई और 1979 में पूरी तरह एक नए रूप में आ गई
प्राचीन पर्शिया: अचेमेनिड साम्राज्य का स्वर्ण युग
History Of Iran In Hindi: लगभग 550 ईसा पूर्व में कुरुश महान (Cyrus the Great) ने मेड्स और बेबीलोनिया को हराकर विश्व का सबसे बड़ा साम्राज्य बनाया। यह साम्राज्य मिस्र से लेकर भारत की सीमाओं तक फैला था। मुख्य रूप से जोरोस्ट्रियनिज्म (Zoroastrianism) – दुनिया का पहला एकेश्वरवादी धर्म था। पर्शिया की संस्कृति अत्यंत उदार और सहिष्णु थी। कुरुश ने बेबीलोन में यहूदियों को गुलामी से मुक्त किया और उन्हें यरुशलम लौटने दिया इसलिए बाइबिल में उसे “मसीहा” कहा गया पर्शिया काफी सिस्टेमैटिक साम्राज्य था जहां दुनिया का पहला डाक तंत्र, राजमार्ग, मानकीकृत मुद्रा और कानून व्यवस्था थी इसकी राजधानी पर्सेपोलिस (Persepolis) – थी आज भी इसके खंडहर दुनिया के सबसे शानदार पुरातात्विक स्थलों में हैं।
इसके बाद दारायुस महान (Darius the Great) और ज़र्क्सिस (Xerxes) ने साम्राज्य को और मजबूत किया। 330 ईसा पूर्व में सिकंदर महान (Alexander the Great) ने पर्शिया पर विजय प्राप्त की। उसके बाद पार्थियन और फिर सासानी साम्राज्य (Sassanid Empire) ने पर्शिया की शान बहाल की। सासानी काल को पर्शिया का दूसरा स्वर्ण युग माना जाता है।
पर्शिया में इस्लाम का आगमन
651 ईस्वी में अरब मुस्लिम सेनाओं ने सासानी सम्राट यज़्दगिर्द तृतीय (Yazdegerd III) को हराया। पर्शिया पर इस्लाम का आगमन हुआ और इस्लामी जिहाद के कारण जोरोस्ट्रियन धर्म का पतन शुरू हुआ। लाखों जोरोस्ट्रियन या तो इस्लाम कबूल कर ले गए या मारे गए या भाग गए। भागने वाले मुख्य रूप से भारत (गुजरात) आए, जहाँ उन्हें पारसी (Parsis) कहा गया। आज भारत में लगभग 60,000 पारसी हैं, जिनमें टाटा, गोदरेज, वाडिया जैसे बड़े उद्योगपति परिवार शामिल हैं। अनुमान है कि 7वीं-8वीं सदी में लाखों जोरोस्ट्रियन या तो मारे गए या धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर हुए।
पर्शिया, ईरान कब बना
When And How Persia Become Iran: 1935 तक दुनिया इसे पर्शिया (Persia) कहती थी। 1935 में शाह रजा पहलवी (Reza Shah Pahlavi) ने आधिकारिक तौर पर देश का नाम ईरान (Iran) कर दिया, जो प्राचीन आर्य भाषा में “आर्यों की भूमि” का अर्थ रखता है। 1950-70 के दशक में शाह मोहम्मद रजा पहलवी (Mohammad Reza Pahlavi) के शासन में ईरान आधुनिक, पश्चिमीकरण और धर्मनिरपेक्षता की ओर बढ़ा। महिलाओं को वोट का अधिकार, शिक्षा, नौकरियां मिलीं, वेस्टर्न ड्रेस, संगीत, सिनेमा, शराब की अनुमति थी तब तेज आर्थिक विकास हुआ तेल से कमाई बढ़ी लेकिन साथ ही सख्त शाहशाही, राजनीतिक विरोधियों का दमन, सवाक (SAVAK) की क्रूरता ही बरक़रार रही.
1979 की इस्लामिक क्रांति: पर्शिया का अंतिम अध्याय
1978-79 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। आयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी (Ayatollah Ruhollah Khomeini), जो पेरिस में निर्वासित थे। 1979 में खुमैनी की वापसी हुई और इस्लामिक गणराज्य ईरान (Islamic Republic of Iran) की स्थापना हुई। 1979 में शाह मोहम्मद रजा पहलवी देश छोड़कर भाग गए। 1979 में ही अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 52 अमेरिकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाया गया। शाह के समर्थक, सेना के बड़े अधिकारी, उद्योगपति, बुद्धिजीवी – हजारों लोग मारे गए या देश छोड़कर भाग गए। महिलाओं को हिजाब अनिवार्य, शराब पर प्रतिबंध, सख्त शरिया कानून लागू कर दिए गए. जोरोस्ट्रियन, यहूदी, ईसाई जैसे अल्पसंख्यक या तो चुप हो गए या देश छोड़कर चले गए।
ईरान उन देशों में से एक है जो इस्लामिक जिहाद का उदाहरण है. ईरान में इस्लाम आने के बाद भी शाह रजा पहलवी ने इसे सेक्युलर देश बनाए रखा मगर आयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी जैसे कट्टरपंथियों ने ईरान को एक शरिया शासित इस्लमिक राज्य बना दिया जहां महिलाओं से आजादी छीन ली गई।
अब ईरान के लोग इस इस्लामी शासन से तंग आ गए हैं और पूरे देश में विरोध हो रहा है और जहां तक है ईरान में अब यह इस्लामी शासन अपने पतन ही ओर है.

