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एक लीटर इथेनॉल बनने में कितना पानी लगता है? जान कर दंग रह जाएंगे

How much water is needed make one liter of ethanol: पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। लेकिन अब इस पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या पेट्रोल बचाने के चक्कर में पानी की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी?

एथेनॉल ब्लेंडिंग क्या है?

एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल (Biofuel) है, जिसे चावल, गन्ना और मक्का जैसी फसलों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है ताकि कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात को कम किया जा सके। भारत सरकार का लक्ष्य एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाकर फ्यूल इंपोर्ट घटाना है।

1 लीटर एथेनॉल = 10,000 लीटर पानी!

Sanjeev Chopra के मुताबिक, चावल से 1 लीटर एथेनॉल बनाने में करीब 10,000 से 10,700 लीटर पानी खर्च हो जाता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा खेती में लगने वाले पानी का होता है। दरअसल, 1 किलो चावल उगाने में ही 3,000–5,000 लीटर पानी लगता है और करीब 2.5–3 किलो चावल से 1 लीटर एथेनॉल बनता है। यही वजह है कि कुल पानी की खपत इतनी ज्यादा हो जाती है।

दूसरे विकल्प भी पानीखोर (Other Crops Comparison)

यानि चावल के मुकाबले ये बेहतर हैं, लेकिन फिर भी पानी की खपत कम नहीं है।

बढ़ सकता है जल संकट

भारत जैसे देश में, जहां पहले से ही पानी की कमी एक बड़ा मुद्दा है, वहां एथेनॉल उत्पादन दबाव बढ़ा सकता है। खासकर उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में, जहां एथेनॉल प्लांट्स (Ethanol Plants) भूजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके अलावा एथेनॉल फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी अगर सही तरीके से ट्रीट न हो, तो यह जल प्रदूषण (Water Pollution) का खतरा भी बढ़ाता है।

सरकार की रणनीति और चुनौती

सरकार एथेनॉल प्रोडक्शन के लिए चावल का इस्तेमाल बढ़ा रही है। 2025–26 के लिए करीब 90 लाख टन चावल का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) में चावल की हिस्सेदारी घटाने की भी योजना है। लेकिन सवाल वही है—क्या फ्यूल बचाने के लिए पानी की कीमत चुकाना सही है?

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