history of waqf board in hindi: इस समय देश वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर बहुत हंगामा मचा हुआ है। वक्फ की शुरुआत भारत में किसने यह निश्चित तो नहीं है। पर माना जाता है इसको प्रारंभ करने वाला मुहम्मद गौरी था, लेकिन कुछ इतिहासकार इल्तुमिश को इसका श्रेय देते हैं। मुग़लकाल में अकबर ने वक्फ को एक व्यवस्थित स्वरूप दिया। लेकिन वक्फ में सुधार करने के प्रयास ब्रिटिश काल में सर सैय्यद अहमद खान ने प्रारंभ किया, और उनके प्रयासों के बाद ही ब्रिटिश सरकार वक्फ बोर्ड की स्थापना की और वक्फ एक्ट बनाया।
क्या है वक्फ
वक्फ जिसका निर्माण अरबी के शब्द ‘वकुफा’ से हुआ है। वकुफा का अर्थ होता है ठहराना या रोकना। और भी सरल शब्दों में समझें तो धन के संदर्भ में इसका एक अर्थ संरक्षित करना भी होगा। इस्लाम धर्म के अनुसार वक्फ का मतलब उस धन-संपत्ति से है, जो जनकल्याण के लिए हो। वक्फ का सीधे-सरल अर्थों में मतलब दान है, जो दानदाताओं द्वारा लोकहितार्थ में दिया जाता है। दान चल और अचल संपत्ति किसी का भी हो सकता है, उसे ही लोकहितों के लिए संरक्षित कर देना वक्फ है।
वक्फ से जुड़ी कहानी
मान्यता है पैगंबर मुहम्मद साहब के समय में 600 खजूरों के एक बाग को वक्फ किया गया था और उससे होने वाली आमदनी को मदीना के लोगों की मदद की जाती थी। इससे जुड़ी एक कहानी भी इस्लाम धर्म में प्रचलित है, जिसके अनुसार खलीफा उमर को खैबर में एक जमीन मिली, उन्होंने पैगंबर साहब से इसके बेहतरीन उपयोग के लिए पूछा, पैगंबर ने कहा इस जमीन को वक्फ कर लो, अर्थात रोककर संरक्षित कर लो और इससे होने वाली उपज को जरूरतमंद लोगों पर खर्च करो। इस जमीन को ना बेचा जाए, ना उपहार दिया जाए और ना ही इसे वंशजों को विरासत में दिया जाए, वक्फ की मूल अवधारणा भी यही थी।
भारत में वक्फ का इतिहास
भारत में वक्फ की औपचारिक स्थापना कब हुई, या किसने की यह निश्चित तौर पर तो नहीं कहा जा सकता है। लेकिन बहुत संभव है यह भारत में इस्लाम के आगमन के बाद ही प्रारंभ हुआ होगा। कुछ लोग मानते हैं, इसकी शुरुआत दक्षिण भारत के मालाबार से हुई होगी। जहां 7वीं शताब्दी से ही अरबी व्यापारियों का खूब आना-जाना था। लेकिन तथ्यात्मक रूप से यह सत्य नहीं प्रतीत होता। माना जाता है मुहम्मद गौरी ने मुल्तान के एक मस्जिद को दो गाँव दान दिए थे, यह दान इस्लामिक शिक्षा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए था। इसे ही कुछ विद्वान वक्फ के प्रारंभिक उदाहरण के तौर पर स्वीकार करते हैं। लेकिन यह यह भी सत्य प्रतीत नहीं होता।
सुल्तान इल्तुतमिश ने रखी वक्फ की नींव
लेकिन प्रतीत होता है भारत में वक्फ की नींव रखने वाला व्यक्ति दिल्ली का सुल्तान इल्तुतमिश था, क्योंकि हिंदुस्तान में व्यवस्थित तौर पर इस्लामिक शासन की नींव इल्तुतमिश ने ही रखी थी, उसने ही इस्लामिक नियमों और परंपराओं व्यवस्थित किया था, इसीलिए वक्फ का प्रारंभ का श्रेय उसे ही दिया जा सकता है। उसके बाद सल्तनत काल में, सुल्तानों ने दान देने की यह परंपरा जारी ही रखी। हालांकि विद्वान यह भी मानते हैं, तब इसका नाम वक्फ ही रहा हो, ऐसा जरूरी भी नहीं है।
अकबर ने किया वक्फ को संगठित
वक्फ की स्थापना भले ही जब हुई हो। लेकिन इसको व्यवस्थित और संगठित करने का श्रेय मुग़लकाल में बादशाह अकबर को जाता है। उन्होंने ही पहली बार वक्फ को संघटित किया था, क्योंकि उनके शासनकाल में, बादशाह और उनकी परिवार के सदस्यों ने धार्मिक और लोकहित में में बहुत सारी सारी जमीनें और संपत्ति दान दिया करते थे। जिससे वक्फ करने की यह प्रथा बहुत लोकप्रिय हुई।
ब्रिटिश काल में वक्फ
चूंकि ब्रिटिशकाल तक आते-आते वक्फ के नाम पर बहुत सारी संपत्तियाँ और धन-दौलत इकट्ठा हो गई थी। ऊपर से इन वक्फ संपत्तियों के प्रबंधकों द्वारा, उचित प्रबंधन में अक्षमता और अयोग्यता के कारण वक्फ बोर्ड में सुधार की जरूरत महसूस हुई। क्योंकि वक्फ की संपत्तियों और धन का गरीब मुस्लिमों के हितार्थ उचित उपयोग नहीं हो पा रहा था। जिसका श्रेय सर सैय्यद अहमद खान को दिया जाता है, उन्होंने ही पहली बार वक्फ में सुधारों के लिए प्रयास करने प्रारंभ किए। उसी का परिणाम था ब्रिटिश सरकार द्वारा 1913 में वक्फ बोर्ड की स्थापना की गई और और 1923 में वक्फ एक्ट बनाया गया। जिसके बाद इन बिखरी हुई संपत्तियों को व्यवस्थित किया गया।