इंदौर। मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने गुरूवार को बड़ा फैसला लेते हुए निणर्य लिया है कि अब 6 अप्रैल से कोर्ट नियमित रूप से इसमें सुनवाई करेगा।
ऐसे होगी सुनवाई
कोर्ट ने यह तय किया है कि पहले याचिकाकर्ताओं के तर्कों को सुना जाएगा, जिसके बाद आपत्तिकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। ज्ञात हो कि इस गंभीर मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ द्वारा की जा रही है।
दो पक्षों का है दावा
दरअसल भोजशाला का जो विवाद है उसमें हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 11वीं सदी का यह स्मारक कमाल मौला मस्जिद है। भोजशाला में वास्तविकता क्या है इसकों लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट याचिकाकर्ताओं और आपत्तिकर्ताओं की बातों को सुनने के साथ ही वहां के ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी स्वयं ले रहा है। जिससे पूरा मामला दूध का दूध और पानी का पानी हो सकें।
पुरातत्व सर्वेक्षण के आधीन है भोजशाला
वर्तमान में भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। हाल ही में कोर्ट के आदेश पर एएसआई द्वारा भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी किया गया था, जिसका उद्देश्य इसकी ऐतिहासिक प्रकृति और मूल संरचना का पता लगाना था। हाल ही में भोजशाला की हकीकत को देखने के लिए हाईकोर्ट के विद्रवान न्यायधीश स्वयं भोजशाला पहुचे थें।
अभी ऐसी है व्यवस्था
भोजशाला में दो समुदाय के दो पक्षों के द्वारा किए गए दावों के बीच अप्रैल, 2003 में एएसआई ने एक आदेश दिया था। जिसके तहत प्रत्येक मंगलवार को परिसर में पूजा करने की अनुमति हिन्दुओं को है, जबकि हर शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति मुसलमानों को है।
