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उज्जैन में मस्जिद तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इंकार, याचिका खारिज

इंदौर। मध्यप्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान शाही मस्जिद पर नगर निगम की कार्रवाई को उचित ठहराते हुए हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दो न्यायमूर्तियों की युगलपीठ ने भोजनावकाश के बाद मामले में सुनवाई करते हुए मस्जिद तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, हांलाकि अभी विस्तृत आदेश जारी नही हुआ है और सोमवार की शाम तक कोर्ट के आदेश की पूरी जानकारी जारी होने की संभावना है।

मस्जिद कमेटी ने लगाई थी याचिका

दरअसल उज्जैन की शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के विरोध में मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह 100 साल से अधिक पुरानी ऐतिहासिक इमारत है। कमेटी के लोगो का कहना था कि इसके दस्तावेज भी मौजूद हैं। करीब 15 दिन पहले एकलपीठ में याचिका खारिज होने के बाद मस्जिद कमेटी ने युगलपीठ के समक्ष यह मामला प्रस्तुत किया। मस्जिद पक्ष का तर्क था कि वर्ष 1975 में यातायात के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी और उसी जमीन पर 40 फीट चौड़ी सड़क बनी हुई है। अब हाई कोर्ट की युगलपीठ के फैसले से उज्जैन नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई पर मुहर लग गई है।

हुआ बबाल

ज्ञात हो कि सोमवार को सुबह मस्जिद को तोड़े जाने के दौरान बबाल हो गया था। मस्लिम समुदाय का एक पक्ष मस्जिद के उस हिस्सों को तोड़ने के लिए पहुचा था, जो कि सड़क निर्माण में बाधा बन रहा था। इसी बीच कुछ लोगो ने विराध जताते हुए पत्थर बाजी करने लगे। स्थित को नियंत्रित में करने के लिए पुलिस ने आशू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस मामले में अफवाह फैलाने वालों समेत उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया है।

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