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अंबेडकर पोस्टर विवाद में अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट से जमानत

ग्वालियर (Gwalior) में डॉ. भीमराव अंबेडकर (Dr. Bhimrao Ambedkar) के पोस्टर पर “मनुवादी” लिखने के मामले में आरोपी अनिल मिश्रा (Advocate Anil Mishra) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) से बड़ी राहत मिली है। ग्वालियर बेंच ने अनिल मिश्रा को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि मामला विचारधारा का है और आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं।

दिसंबर 2025 में ग्वालियर के फूलबाग क्षेत्र में डॉ. अंबेडकर के बड़े पोस्टर पर किसी ने लाल रंग से “मनुवादी” लिख दिया था। इस घटना की शिकायत पर पुलिस ने अनिल मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया। उन पर SC/ST एक्ट (SC/ST Act) की धाराएं लगाई गईं, साथ ही धार्मिक भावनाएं आहत करने और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान पहुंचाने के आरोप थे। अनिल मिश्रा पर आरोप था कि उन्होंने यह पोस्टर लगवाया या लिखवाया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।

हाईकोर्ट के जस्टिस ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला “विचारधारा का टकराव” लगता है। कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट और सबूतों को देखा और पाया कि आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है। जमानत पर कुछ शर्तें लगाई गईं – जैसे जांच में सहयोग करना और इलाके में शांति बनाए रखना।

राजनीतिक और सामाजिक रिएक्शंस

यह मामला ग्वालियर में काफी चर्चा में रहा था, क्योंकि डॉ. अंबेडकर की तस्वीर पर लिखावट को दलित समाज ने अपमान माना था। अब जमानत मिलने से मामला फिर सुर्खियों में है। ट्रायल कोर्ट में मुख्य केस अभी चल रहा है।

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