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High blood pressure उच्च रक्तचाप यानि खामोश हत्यारा, भारत में 22 करोड़ वयस्क प्रभावित

High blood pressure विश्व उच्च रक्तचाप दिवस। हर साल 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के खतरों और इसके प्रबंधन के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग की एक पहल है, जो इसे साइलेंट किलरष् (खामोश हत्यारा) के रूप में पहचान कर इसकी रोकथाम पर जोर देती है। यह दिन लोगों को अपने रक्तचाप के आंकड़ों को जानने के लिए प्रोत्साहित करता है। 

भारत में उच्च रक्तचाप की स्थित

भारत में उच्च रक्तचाप एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बन गया है, जिससे लगभग 22 करोड़ वयस्क प्रभावित हैं। यह स्थिति अब एक साइलेंट किलर की तरह तेजी से फैल रही है, जिसमें चार में से एक वयस्क पीड़ित है। जागरूकता की कमी और खराब जीवनशैली के कारण केवल 10-12 प्रतिशत लोगों का बीपी ही नियंत्रित है।


मुख्य विवरण

उद्देश्य- उच्च रक्तचाप की समय पर पहचान, रोकथाम और उपचार के बारे में शिक्षित करना।
महत्व- यह हृदय रोग, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है।

महत्वपूर्ण बातें

लक्ष्य रक्तचाप- सामान्य तौर पर 120/80 से कम, जबकि 140/90 से ऊपर को उच्च माना जाता है।
जोखिम कारक- अधिक नमक का सेवन, तंबाकू,शराब का उपयोग, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव।
समाधान- स्वस्थ जीवन शैली, नियमित व्यायाम और नियमित बीपी चेकअप।

भारत में उच्च रक्तचाप की स्थितियाँ

व्यापकता- भारत में उच्च रक्तचाप का समग्र प्रसार लगभग 22.6 प्रतिशत से 28.1 प्रतिशत के बीच है। शहरी निवासियों (25-28.8ः) में यह ग्रामीण निवासियों (21.4-14.5ः) की तुलना में थोड़ा अधिक है।
लिंग भेद- पुरुषों में यह समस्या महिलाओं की तुलना में अधिक है (24.1ः पुरुष बनाम 21.2ः महिलाएं)।
आयु कारक- 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में इसका प्रसार 48.4ः तक पहुंच जाता है।
अनियंत्रित मामले- लगभग आधे मरीजों को अपनी बीमारी के बारे में पता ही नहीं है। निदान, उपचार और नियंत्रण का अनुपात बहुत कम है, जिससे हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की समस्याओं का खतरा बढ़ गया है।
क्षेत्रीय भिन्नता- सिक्किम में सबसे अधिक (37.9ः) और राजस्थान में सबसे कम (16.5ः) प्रसार देखा गया है।
नियंत्रण प्रयास- भारत उच्च रक्तचाप नियंत्रण पहल, के तहत 25 से अधिक राज्यों में उपचार को मजबूत करने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत अब तक 7 लाख से अधिक मरीजों का बीपी नियंत्रित किया जा चुका है।




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