बचपन में बढ़ता मोटापा अपने चिंता बनता जा रहा है हाल ही में एक रिसर्च के अनुसार पता चला है कि Healthy Obesity यानी स्वस्थ दिखने वाला मोटापा जो खासतौर पर छोटे बच्चों में देखा जाता है वह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता है। भले ही उनके ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर सामान्य हो लेकिन भविष्य में उन्हें दिल और मेटाबॉलिक बीमारियों का रिस्क बना रहता है।
Healthy Obesity क्या होती है?
अगर मेडिकल तरीके से समझाया जाए तो Healthy Obesity उसे स्थिति को कहा जाता है जब बच्चा मोटापे का शिकार होता है लेकिन उसके मेटाबॉलिक पैरामीटर जैसे कि ब्लड प्रेशर बॉडी में शुगर और लिपिड प्रोफाइल बिल्कुल नॉर्मल इंसान की तरह ही रहते हैं।
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इसके मेडिकल रिसर्च में क्या खुलासा हुआ है
डॉक्टर की नई रिसर्च बताती है कि ऐसे बच्चों में कार्डियोमेटाबॉलिक रिस्क मौजूद रहता है जिसका मतलब होता है कि भविष्य में हाथ से जुड़ी बीमारियां, टाइप 2 की डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा बढ़ता देखा जा सकता है। डॉक्टर के अनुसार शरीर में अंदरूनी बदलाव धीरे-धीरे बचपन से ही शुरू हो जाते हैं जो समय के साथ शरीर में गंभीर रूप भी ले लेते हैं।
बच्चों की “नॉर्मल रिपोर्ट” पूरी सच्चाई नहीं
जानकारी में बताया गया है कि जिन बच्चों के सभी टेस्ट बिल्कुल नॉर्मल रहते हैं उनमें भी ब्लड वेसल्स का शुरुआती असर दिखता है। यह संकेत देता है कि केवल रिपोर्ट्स देखकर किसी को पूरी तरह स्वस्थ मन लेना सही नहीं होता है जिसका मतलब है कि खतरा छिपा हुआ हो सकता है जो दिखाई नहीं दे रहा हो, इससे बचने के लिए हमें समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।
Healthy Obesity से समय के साथ बढ़ सकता है जोखिम
डॉक्टर के अनुसार मोटा पर रहते हुए भी हेल्दी लगना स्थाई नहीं होता है कई बच्चे समय के साथ मेटाबॉलिक अनहेल्दी भी हो जाते हैं। इसका सीधा असर बच्चों के वयस्क जीवन पर देखने को मिलता है जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियां और डायबिटीज का खतरा कई गुना तक हो जाता है।
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बचने के लिए क्या करें पेरेंट्स और डॉक्टर?
डॉक्टर ऐसी सलाह देते हैं कि बच्चों के स्वास्थ्य का आकलन केवल टेस्ट के आधार पर नहीं करना चाहिए, बच्चों को बचपन से ही स्वस्थ डायट देनी चाहिए और रोजाना उसकी फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने चाहिए। मोबाइल की स्क्रीन टाइम को भी सीमित करना चाहिए सभी कदम बच्चों के भविष्य की जोखिम को बचाने में मदद करते हैं।

