वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों ने बैंकिंग सेक्टर में हलचल तेज कर दी है। HDFC Bank और ICICI Bank जैसे दिग्गजों के साथ-साथ Yes Bank और RBL Bank ने भी अपने प्रदर्शन से बाजार को चौंकाया है। बजट 2026 से पहले आए इन परिणामों ने निवेशकों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मौजूदा वैल्युएशन और ग्रोथ आउटलुक को देखते हुए निवेश के लिए सबसे बेहतर विकल्प कौन सा है।
बैंकिंग सेक्टर के तिमाही नतीजों का विश्लेषण
अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही भारतीय निजी बैंकों के लिए उम्मीद से बेहतर रही है। निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता HDFC Bank ने राजस्व में 8.9% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है, जो इसकी विलय के बाद की स्थिरता को दर्शाता है। वहीं, ICICI Bank ने अपने डिपॉजिट बेस और शुद्ध लाभ (PAT) में निरंतरता बनाए रखी है।
छोटे और मध्यम आकार के बैंकों में Yes Bank का प्रदर्शन विशेष रूप से चर्चा में है। बैंक के शुद्ध लाभ में 55% से अधिक का उछाल यह संकेत देता है कि इसकी ‘टर्नअराउंड’ रणनीति अब जमीन पर दिखने लगी है। RBL Bank ने भी अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 7% की वृद्धि के साथ बाजार को सकारात्मक संकेत दिए हैं।
ICICI Bank: टेक्निकल चार्ट पर सबसे मजबूत दावेदार
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, HDFC vs ICICI vs Yes vs RBL Bank की तुलना में ICICI Bank फिलहाल सबसे आकर्षक नजर आ रहा है। जब हाल के हफ्तों में निफ्टी और बैंक निफ्टी में बिकवाली का दबाव था, तब ICICI के शेयरों ने अपनी मजबूती बनाए रखी। यह स्पष्ट रूप से बैंकिंग सेक्टर में संस्थागत निवेशकों की पसंद को दर्शाता है।
टेक्निकल चार्ट पर नजर डालें तो ICICI Bank एक ‘कप एंड हैंडल’ पैटर्न बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्टॉक ₹1,430 के स्तर को पार करता है, तो इसमें ₹1,520 से ₹1,550 के लक्ष्य आसानी से देखे जा सकते हैं। रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो के लिहाज से यह ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए इस समय पहली पसंद बना हुआ है।
HDFC Bank में लंबी अवधि का भरोसा
फंडामेंटल नजरिए से HDFC Bank की स्थिति अभी भी काफी मजबूत है। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 19.9% है, जो बैंकिंग नियमों के मानक से काफी ऊपर है। इसका मतलब है कि भविष्य में किसी भी आर्थिक अनिश्चितता से निपटने के लिए बैंक के पास पर्याप्त पूंजी मौजूद है।
भले ही शॉर्ट टर्म में स्टॉक की चाल सुस्त दिख रही हो, लेकिन ₹45,870 करोड़ का शुद्ध राजस्व यह बताता है कि बैंक की कमाई की क्षमता कम नहीं हुई है। जो निवेशक पोर्टफोलियो में स्थिरता और सुरक्षा चाहते हैं, उनके लिए यह स्टॉक गिरावट पर जमा करने वाला (Accumulate) विकल्प है।
Yes Bank और RBL Bank: जोखिम और अवसर
Yes Bank ने अपने रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) को सुधारकर 0.9% कर लिया है। बैंक का फोकस अब सुरक्षित रिटेल लोन और कमर्शियल बैंकिंग पर है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि टर्नअराउंड शेयरों में उतार-चढ़ाव अधिक होता है।
दूसरी ओर, RBL Bank का ध्यान अपनी एसेट क्वालिटी सुधारने पर है। ₹214 करोड़ का शुद्ध लाभ और बढ़ता ऑपरेटिंग प्रॉफिट यह बताता है कि बैंक धीरे-धीरे अपनी राह पकड़ रहा है। लेकिन, बड़े बैंकों की तुलना में यहाँ रिकवरी की गति थोड़ी धीमी रह सकती है।
बजट 2026 और बैंकिंग शेयरों पर प्रभाव
आगामी केंद्रीय बजट 2026 के उपभोक्ता-केंद्रित (Consumer-oriented) होने की संभावना है। यदि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाने वाले कदम उठाती है, तो बैंकिंग शेयरों में बड़ी तेजी की उम्मीद की जा सकती है। क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन सेगमेंट में सक्रिय बैंकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें और स्टॉप लॉस का सख्ती से पालन करें। बैंकिंग सेक्टर में फिलहाल ‘क्वालिटी’ पर दांव लगाना अधिक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
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