रीवा के श्यामशाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी मेमोरियल (GMH) अस्पताल के गायनी वार्ड में दो दिन पूर्व हुई 22 वर्षीय प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के मामले में शासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। इस संवेदनशील घटना के बाद शनिवार को 7 सदस्यीय विशेष उच्च स्तरीय जांच टीम रीवा पहुंची और मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मामले से जुड़े चिकित्सकों व नर्सों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लापरवाही के प्राथमिक आरोपों के चलते प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अब तक दो चिकित्सकों डॉ. सोनम अग्रवाल और डॉ. निधि पांडेय तथा दो नर्सों को निलंबित कर दिया है, जिसके बाद से अस्पताल के स्टाफ में हड़कंप मचा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार सुबह ऑपरेशन से प्रसव के बाद प्रसूता और उनके नवजात की मौत हो गई थी, जिससे आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठ गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भाजपा विधायक नरेंद्र प्रजापति मौके पर पहुंचे और परिजनों से चर्चा की। इसके बाद अधीक्षक कार्यालय में हुई मैराथन बैठक के दौरान परिजनों ने नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की, जिस पर अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत दो नर्सों को निलंबित कर दिया, जबकि मेडिकल कॉलेज के डीन ने इलाज के सभी पहलुओं की उच्च स्तरीय जांच के लिए विशेष टीम गठित कर दी।
शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में प्रसूता के हाइपरटेंशन से पीड़ित होने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें समय पर मरीज की वास्तविक और गंभीर स्थिति की जानकारी नहीं दी थी। फिलहाल, जिला अस्पताल के डॉक्टरों की टीम द्वारा दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट और इस 7 सदस्यीय संयुक्त जांच समिति के अंतिम निष्कर्षों के बाद ही मौत के असली कारणों और चिकित्सकीय लापरवाही की परतें पूरी तरह से साफ हो सकेंगी। माना जा रहा है कि इस जांच रिपोर्ट के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े व कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।

