विश्व प्रसन्नता दिवस। हर साल 20 मार्च को वर्ल्ड हैप्पीनेस डे मनाया जाता है, क्योकि खुशी को मानव जीवन का एक मौलिक लक्ष्य और सार्वजनिक नीति का अभिन्न अंग माना गया है। जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा जीवन में खुशी और भलाई के महत्व को पहचानने के लिए 2012 में घोषित किया गया था। इस दिन वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट जारी की जाती है, जिसमें फिनलैंड लगातार शीर्ष पर है, जबकि भारत की रैंकिंग अक्सर कम रहती है।
क्यो मनाते है वर्ल्ड हैप्पीनेस डे
खुशी को मानव जीवन का एक मौलिक लक्ष्य और सार्वजनिक नीति का अभिन्न अंग मानना है। इससे न सिर्फ स्वयं अच्छा होता है बल्कि घर, परिवार, समाज, गांव और राष्ट्र पर असर पड़ता है। इसे देखते हुए भूटान की पहल पर, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 28 जून 2012 को इसे 20 मार्च को मनाने की घोषणा किया था। यह दिन विकास के आर्थिक संकेतकों से परे लोगों की खुशी और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर जोर देता है।
ऐसे तैयार की जाती है रिर्पोट
वर्ल्ड हैप्पीनेस की यह रिपोर्ट 6 प्रमुख कारकों पर आधारित होती हैः प्रति व्यक्ति जीडीपी, सामाजिक सहयोग, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार के अभाव को रिर्पोट में शामिल किया जाता है। जिसके आधार पर वर्ल्ड हैप्पीनेस डे के अंक तय किए जाते है।
भारत का 118वां स्थान
वर्ल्ड हैप्पीनेस डे को लेकर भारत की स्थिति पर नजर दौड़ाई जाए तो वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 में भारत 147 देशों में से 118वें स्थान पर रहा है। यह रैंकिंग पिछले वर्षों (2024 में 126वां) की तुलना में सुधार दर्शाती है। रिपोर्ट में सामाजिक समर्थन, जीडीपी, जीवन प्रत्याशा और भ्रष्टाचार जैसे कारकों के आधार पर खुशहाली का आकलन किया जाता है। फिनलैंड लगातार सबसे खुशहाल देश बना हुआ है।
वर्ल्ड हैप्पीनेस डे की मुख्य बाते
उद्देश्यः खुशी को मानव जीवन का एक मौलिक लक्ष्य और सार्वजनिक नीति का अभिन्न अंग मानना।
शुरुआतः भूटान की पहल पर, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 28 जून 2012 को इसे 20 मार्च को मनाने की घोषणा की।
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्टः यह रिपोर्ट 6 प्रमुख कारकों पर आधारित होती हैः प्रति व्यक्ति ळक्च्, सामाजिक सहयोग, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार का अभाव।
सबसे खुशहाल देशः 2025 में भी फिनलैंड 7.7 पॉइंट्स के साथ लगातार आठवें साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना रहा।
भारत की स्थितिः वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 में भारत 147 देशों में से 118वें स्थान पर रहा।
महत्वः यह दिन विकास के आर्थिक संकेतकों से परे लोगों की खुशी और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर जोर देता है।

