Gupt Navratri Ashtami Puja Vidhi 2026 : गुप्त नवरात्रि अष्टमी पर विशेष पूजा विधि-मंत्र और नियम-गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में एक अत्यंत गूढ़, रहस्यमयी और शक्तिशाली साधना काल माना जाता है। यह नवरात्रि विशेष रूप से तंत्र साधना, महाविद्या उपासना और आत्मिक उन्नति के लिए जानी जाती है। इन नौ दिनों में की गई साधना गोपनीयता, शुद्धता और अनुशासन पर आधारित होती है। गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा एवं दस महाविद्याओं की कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि अष्टमी के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से साधना शीघ्र फलदायी होती है। Gupt Navratri Ashtami Puja Vidhi in Hindi-जानिए गुप्त नवरात्रि की अष्टमी पूजा की संपूर्ण विधि, पूजा सामग्री, मंत्र जाप, कन्या पूजन, व्रत नियम और गुप्त साधना का महत्व।
गुप्त नवरात्रि अष्टमी पूजा का संक्षिप्त महत्व
अष्टमी को शक्ति का चरम स्वरूप माना गया है,गुप्त साधना में सिद्धि प्राप्ति का श्रेष्ठ अवसर। महाविद्याओं की उपासना विशेष फल देती है,साधक की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
गुप्त नवरात्रि अष्टमी पूजा सामग्री-(सामान्य सूची)
सबसे पहले मन – कर्म और वचन से स्वयं को शुद्ध करें जिसमें स्नान-स्वच्छ वस्त्र पहनें। विशेष यह की गुप्त नवरात्री की पूजक रात्रि के दूसरे चरण में करें तो बेहतर है साथ ही इस पूजन को भी गुप्त ही रखें यानि शारदेय नवरात्री के सभी उत्सव हम परिवार मित्रों के साथ करते है लेकिन इस नवरात्री में चाहे तो एकांत पूजन करें अथवा परिवार शामिल हो तो पूर्ण शांति के साथ पूजा प्रारम्भ करें जिसमें सबसे पहले मां दुर्गा या महाविद्या की प्रतिमा या चित्र के समक्ष कलश प्रज्वलित करें फिर चित्र पर लाल चुनरी, लाल फूल (गुड़हल श्रेष्ठ),अक्षत (चावल), रोली, चंदन, सिंदूर अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप (घी का), कपूर गंगाजल, कलावा, आम के पत्ते,सुपारी, लौंग, इलायची,फल, मिठाई, बताशे, मिश्री,नारियल, सिक्का अर्पित कर मां दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पथ करें।
गुप्त नवरात्रि अष्टमी पूजा विधि (Step-by-Step)
स्नान और संकल्प-अष्टमी की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें। मां दुर्गा के पूजन का संकल्प लें।
कलश स्थापना-एक पात्र में शुद्ध जल व गंगाजल मिलाएं। उसमें सिक्का, सुपारी, हल्दी, लौंग डालें। कलश के ऊपर आम के पत्ते रखें और नारियल को स्वास्तिक बनाकर, कलावा या चुनरी से सजाकर स्थापित करें।
देवी की स्थापना-मां दुर्गा या अपनी इष्ट महाविद्या की प्रतिमा/चित्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें।
श्रृंगार एवं पूजन-मां को लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत, चंदन, लाल फूल अर्पित करें। धूप-दीप जलाएं और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
मंत्र जाप और पाठ-दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
बीज मंत्रों का जाप करें-सामान्य मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं हुं फट्
महाविद्या मंत्र-“श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैररोचनिए हूं हूं फट् स्वाहा”
भोग और आरती-फल, मिठाई, बताशे या मिश्री का सात्विक भोग लगाएं। कपूर या घी के दीपक से आरती करें।
कन्या पूजन (वैकल्पिक पर अत्यंत शुभ)-यदि संभव हो तो कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन और दक्षिणा दें। यह अष्टमी पूजा का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।
गुप्त साधना का पालन-पूजा, जप और साधना को पूर्णतः गुप्त रखें। इसका दिखावा न करें। मान्यता है कि जितनी अधिक गोपनीयता, उतना अधिक पुण्य फल।
विशेष व्रत और पारण-अष्टमी को फलाहार व्रत रखें। व्रत का पारण अगले दिन करें।
ध्यान रखने योग्य विशेष नियम
ब्रह्मचर्य का पालन करें,
क्रोध, नकारात्मक विचारों से दूर रहें,
सात्विक भोजन करें, मांसाहार व मदिरा से परहेज,
साधना काल में बाल, दाढ़ी, नाखून न काटें,
पूजा में पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता रखें।
निष्कर्ष (Conclusion)-गुप्त नवरात्रि की अष्टमी पूजा शक्ति उपासना का सर्वोच्च अवसर मानी जाती है। यह साधना बाहरी प्रदर्शन से नहीं, बल्कि आंतरिक श्रद्धा, संयम और गोपनीयता से फलित होती है। यदि अष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और नियमों का पालन किया जाए, तो मां दुर्गा एवं महाविद्याओं की कृपा से आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति संभव होती है।
