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रीवा में चढ़ा होली का रंग, बाजारों में गुलाल-पिचकारियों की बहार, हर्बल रंगों की बढ़ी मांग

Gulal-pichkaris are out in the markets demand for herbal colors increasedGulal-pichkaris are out in the markets demand for herbal colors increased

Gulal-pichkaris are out in the markets demand for herbal colors increased

Gulal-pichkaris are out in the markets demand for herbal colors increased: रीवा में होली का उत्साह चरम पर है और शहर के प्रमुख बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, आकर्षक पिचकारियों और त्योहार की सजावट से गुलजार हो उठे हैं। शिल्पी प्लाजा, फोर्ट रोड, सिरमौर चौराहा और प्रयागराज रोड समेत कई इलाकों में दुकानों पर अबीर-गुलाल, पानी की पिस्तौल, मुखौटे और होली की अन्य सामग्री की कतारें लगी हैं। सुबह से देर शाम तक खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है, जिससे व्यापारियों के चेहरे खिले नजर आ रहे हैं।

इस बार बाजार में एक खास बदलाव देखने को मिल रहा है—लोग केमिकलयुक्त रंगों से दूरी बनाकर प्राकृतिक और हर्बल गुलाल को प्राथमिकता दे रहे हैं। त्वचा संबंधी समस्याओं, एलर्जी और पर्यावरणीय नुकसान को ध्यान में रखते हुए फूलों, जड़ी-बूटियों और अन्य प्राकृतिक तत्वों से बने रंगों की मांग तेजी से बढ़ी है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में हर्बल गुलाल की बिक्री में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।

होली अब केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी बनती जा रही है। शहर में उत्साह, उमंग और खरीदारी की रौनक के बीच लोग सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल होली मनाने की तैयारी में जुटे हैं।

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