Gujarat Cabinet Oath : गुजरात में भाजपा सरकार ने एक बार उलट-फेर कर दिया है। भाजपा के फैसले ने एक बार सभी को चौंका दिया है। गुजरात सरकार में गुरुवार को मुख्यमंत्री को छोड़कर एक साथ 16 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। आज शुक्रवार को गुजरात मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हो गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजदूगी में नए 26 विधायकों ने गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में शपथ ग्रहण की। गुजरात में ये पहली बार नहीं हुआ, बल्कि भाजपा सरकार ने 2021 में भी मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों को बदल दिया था और अब तो यह गुजरात की परंपरा बन गई है…
गुजरात में 26 नए सदस्यों ने ग्रहण की शपथ
गुजरात में शुक्रवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की नई मंत्रिपरिषद का विस्तार हो गया है, जिसमें 26 नए सदस्यों ने शपथ ग्रहण की। इस बदलाव को आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुत जरूरी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मुलाकात की, और नई मंत्रिपरिषद का ऐलान किया। नई कैबिनेट में अलग-अलग क्षेत्र के नेताओं को स्थान दिया गया है। भूपेंद्र पटेल की सरकार में सौराष्ट्र-कच्छ से 9 मंत्री, मध्य गुजरात से 6, उत्तर गुजरात से 5 और अहमदाबाद से 1 मंत्री बनाए गए हैं।
एक साथ 16 मंत्रियों ने दिया था इस्तीफा
बता दें कि गुजरात में गुरुवार को एक साथ 16 मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद नए मंत्रियों की नियुक्ति की गई। यह कदम सरकार की ओर से नए मंत्रिपरिषद के गठन की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि भाजपा ने गुजरात सरकार में ये बदलाव सरकार की मजबूती के लिए किया है।
भूपेंद्र मंत्रीमंडल में किसको मिली जगह
सौराष्ट्र-कच्छ से मंत्री
- पोरबंदर से अर्जुन मोढवाडिया
- कोडिनार से घंटानाद
- मोरबी से कांति अमृतिया
- अमरेली से कौशिश वेकारिया
- जामनगर उत्तर से रिवाबा जडेजा
- भावनगर पश्चिम से जीतू वघानी
- अंजार से त्रिकामा छंगा
दक्षिण गुजरात से मंत्री
- वराछा से कुमार कनानी
- गणेश से नरेश पटेल
- नाइजर से जयराम गामित
- अंकलेश्वर से ईश्वर पटेल
उत्तर गुजरात से मंत्री
- भिलोदा से पीसी बरामदा
- दीसा से प्रवीण मारी
- स्वरूजी ठाकोर
मध्य गुजरात से सदस्य
- दर्शना वाघेला
- रमेश कटारा
- मनीषा वकील
- कमलेश पटेल
- संजय सिंह महिदा
- रमन सोलंकी
मंत्रियों ने एक साथ इस्तीफा क्यों दिया?
मौजूदा सरकार के अधिकांश मंत्रियों से पार्टी के वरिष्ठ नेता संतुष्ट नहीं हैं। जिन उम्मीदों के साथ उन्हें मंत्री बनाया गया था, वे अपने कर्तव्य ठीक से नहीं निभा पाए हैं। इसके साथ ही, हाल ही में विसावदर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था, जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल इटालिया ने जीत हासिल की थी। इसी कारण से भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह निर्णय लेना पड़ा, क्योंकि दो साल बाद यानी साल 2027 में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राजनीतिक चर्चा में कहा जा रहा है कि 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए और इस सीट पर आप की जीत के कारण पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि लंबे समय से पार्टी ने जिन बड़े नेताओं को किनारे कर दिया था, उन्हें फिर से सरकार में शामिल किया जा सकता है।
यह भी पढ़े : Bihar Election 2025 : महागठबंधन में डील पक्की! RJD ने VIP को दी 18 सीटें, कांग्रेस हुई खफा
