बैंक उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर, डिजिटल फ्रॉड होने पर ग्राहकों को मिलेगे अब पैसे

आरबीआई। बैंक उपभोक्ताओं के लिए भारतीय रिजर्व बैंक बड़ी तैयारी कर रहा है। आरबीआई ने डिजिटल फ्रॉड (ऑनलाइन ठगी) के मामलों में ग्राहकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा ड्राफ्ट जारी किया है। जिसके तहत, ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में आपको 50,000 तक के नुकसान पर 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 का मुआवजा मिल सकता है। यह कदम डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाने और ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

5 दिन के अंदर करनी होगी शिकायत

ज्ञात हो कि डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ते दौर में साइबर धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अब भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की जवाबदेही से जुड़े नियमों में संशोधन का एक ड्राफ्ट (प्रारूप) जारी किया है। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को व्यापक सुरक्षा प्रदान करना और छोटे मूल्य के फ्रॉड के लिए मुआवजे की व्यवस्था करना है। बशर्ते आप 5 दिनों के भीतर बैंक और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर 6 अप्रैल, 2026 तक जनता से सुझाव मांगे हैं। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो ये नए नियम 1 जुलाई, 2026 से लागू हो जाएंगे।

बैंकों पर होगा जिम्मेदारी का बोझ

प्रस्तावित नियमों के तहत, आरबीआई ने अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन की परिभाषा को बड़ा कर दिया है। अब इसमें जबरदस्ती या धोखाधड़ी के तहत किए गए भुगतान भी शामिल होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में अब सबूत जुटाने की जिम्मेदारी बैंक की होगी। बैंक को यह साबित करना होगा कि गलती ग्राहक की थी, न कि सिस्टम की।

आरबीआई के नए प्रस्तावित नियमों की मुख्य बातें

मुआवजा राशि- 50,000 तक के फ्रॉड पर नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 का मुआवजा मिलेगा।
समय सीमा- फ्रॉड होने के 5 कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करनी होगी।
जीवन में एक बार- यह मुआवजा एक ग्राहक को पूरे जीवनकाल में केवल एक बार ही मिलेगा।
बैंक पर सबूत का बोझ- अगर फ्रॉड बैंक की किसी तकनीकी कमी या लापरवाही से हुआ है, तो बैंक को साबित करना होगा कि गलती ग्राहक की थी।
कब होगा प्रभावी- यह एक ड्राफ्ट गाइडलाइन है, जिस पर 6 अप्रैल, 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं और इसके 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *