Gold Futures में 10% तक गिरावट, मजबूत डॉलर और Fed की अनिश्चितता

Gold Futures में 10% तक गिरावट, मजबूत डॉलर और Fed की अनिश्चितता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold Futures और चांदी के भाव में अचानक तेज गिरावट देखी गई है। मजबूत अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व की सख्त नीति संकेत और मुनाफावसूली के चलते निवेशकों ने बुलियन बाजार से थोड़ी दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे कीमतों में लगभग 10% तक की बड़ी टूट देखने को मिल रही है।

Gold Futures में 10% तक गिरावट, मजबूत डॉलर और Fed की अनिश्चितता से बाजार में भारी बिकवाली

Gold Futures पर मजबूत डॉलर का सीधा असर

कमोडिटी बाजार में डॉलर की मजबूती का असर सबसे पहले सोना और चांदी पर ही दिखाई देता है। जब अमेरिकी मुद्रा मजबूत होती है तो अन्य देशों के निवेशक के लिए सोना महंगा हो जाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय लेवल पर खरीदारी घटती है और बिकवाली का दबाव भी बढ़ता है। हाल ही के कारोबारी सत्र में यही ट्रेंड देखने को मिला, जहां डॉलर इंडेक्स में तेजी के साथ ही Gold Futures में गिरावट तेज हो गई है।

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Fed नीति को लेकर अनिश्चितता ने बढ़ाई बेचैनी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बाजार में स्पष्टता नहीं दिखती है। निवेशकों को लग रहा है कि दरों में कटौती की प्रक्रिया और धीमी हो सकती है या फिलहाल टल सकती है। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोना जैसे बिना ब्याज वाले निवेश के साधन की आकर्षण क्षमता और कम हो जाती है। इसी धारणा ने Gold Futures में निवेशकों की धारणा कमजोर की है।

चांदी में Gold Futures से ज्यादा तेज गिरावट क्यों

बाजार में यह देखा गया कि चांदी के वायदा भाव सोने की तुलना में ज्यादा तेजी से गिर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि चांदी एक औद्योगिक धातु भी है और जब वैश्विक आर्थिक संकेत कमजोर दिखते हैं तो इसकी मांग पर सीधा असर पड़ता है। निवेश करने वाले लोग रिस्क वाले एसेट से दूरी बनाते हैं, जिससे चांदी में बिकवाली ज्यादा तेज हो जाती है।

मुनाफावसूली ने गिरावट को दिया और बल

पिछले कुछ हफ्तों में सोने और चांदी में तेज उछाल देखने को मिला था। कई निवेशक ने ऊंचे स्तर पर अपने सौदे काटकर मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया। जब बड़े स्तर पर पोजीशन बंद होती जाती हैं, तो कीमतों में तेज गिरावट आना सामान्य बात होती है। यही कारण है कि Gold Futures में गिरावट और गहरी हो गई।

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आगे क्या रह सकता है रुझान

निवेश करने वाले विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि की कमजोरी नहीं बल्कि एक कलेक्शन फेस बताते हैं। अगर भविष्य में फेड की नीति नरम होती है या डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोने-चांदी में फिर से खरीदारी लौट सकती है। फिलहाल बाजार अस्तित्व के दौर से गुजर रहा है जहां हर वैश्विक संकट का असर सीधा कीमतों पर दिखता है।

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