Gold ETF में हाल ही में आई 12% से 18 परसेंट तक की तेज गिरावट ने म्यूचुअल फंड निवेश करने वाले लोगों को असमंजस में डाल दिया है हालांकि सोने के वास्तविक कीमत में इतनी बड़ी गिरावट नहीं देखी गई जिससे संकेत मिलता है कि यह बदलाव तकनीकी कर्म से जुदा हो सकता है ना कि किसी प्रकार की बुनियादी कमजोरी के कारण।

गोल्ड ETF की गिरावट के पीछे असली वजह क्या?
मार्केट में देखिए यह गिरावट सीधे तौर पर सोने की फिजिकल कीमत से मिल नहीं खाती है विशेषज्ञ के अनुसार यह गिरावट मुख्य रूप से प्रॉफिट बुकिंग और पहले से बने प्रीमियम के टूटने का कारण है। जिसका मतलब है कि निवेश करने वाले लोगों ने तेजी के दौरान कमाए गए मुनाफे को अब इससे निकलने शुरू कर लिया है जिससे ETF की कीमतों पर दबाव बना हुआ है ये अधिकतर इमोशनल और लिक्विडिटी ड्राइवरमेंट मूवमेंट के कारण होता था।
ये भी पढ़े : Sensex 450 अंक टूटा, Nifty 25,300 के नीचे, गिरावट के 3 चौंकाने वाले कारण
क्या सोने के fundamentals में कोई बदलाव आया है?
विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि वैश्विक स्तर पर सोने के सुरक्षित निवेश की छवि अभी बरकरार दिख रही है राजनीतिक तनाव, आर्थिक और महंगाई जैसे कारण अब भी सोने को समर्थन दे रहे है। ऐसे में सोने की ETF में आई गिरावट को सोने की बुनियादी कमजोरी के रूप में नहीं देखा जा सकता।
विशेषज्ञों की राय Hold, Add या Exit?
मार्केट विशेषज्ञ का ऐसा सुझाव है कि निवेश करने वाले लोगों को अपने निवेश की अवधि के आधार पर फैसला लेना चाहिए अगर आप लंबी अवधि तक जैसे 3 से 5 साल या उससे अधिक समय के लिए निवेश करते हैं तो यह गिरावट आपके लिए एक अवसर का मौका हो सकती है। धीरे-धीरे निवेश करके आप औसत कीमत को संतुलित कर सकते हैं। लेकिन ऐसे निवेश करने वाले लोग जो मध्यम अवधि के लिए निवेश करते हैं उन्हें बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए। इन सबके अलावा कुछ ऐसे भी निवेश करने वाले लोग होते हैं जो शॉर्ट टर्म के लिए निवेश करते हैं उन लोगों के लिए बाजार का यह समय रिस्क वाला बताया जा रहा है।
Staggered Buying क्यों है बेहतर रणनीति?
मार्केट विशेषज्ञ के अनुसार बड़ी रकम लगाने के बजाय अगर आप प्रक्रिया के अनुसार निवेश करते हैं तो आपके लिए ज्यादा अच्छा रहता है इससे बाजार की अस्थिरता का असर कम होता है और औसत खरीद मूल्य बेहतर बांटा जाता है। gold ETF जैसे साधनों में यह प्लानिंग जोखिम कम करने में मददगार है।
ये भी पढ़े : Kalyan Jewellers share में भूचाल! एक दिन में 14% गिरावट…. जाने वजह
निवेशकों के लिए क्या है सही दृष्टिकोण?
गोल्ड ईटीएफ पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का एक जरूरी हिस्सा बताया जाता है लेकिन इससे कुल निवेश का सीमित हिस्सा ही रखना समझदारी होगा घबराहट में बेचने के बजाय निवेश के अपने लक्ष्य को, समय सीमा के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। Gold ETF में आई यह गिरावट दिखने में भले ही बड़ी लगे, लेकिन इसके पीछे सोने की बुनियादी कमजोरी नहीं बिल्कुल है। यह अधिकतर profit booking और बाजार में भाव स्थिर और अस्थिर होने का परिणाम है।
