Hindi Touching Story: राधा ज़िंदगी भर अपने घर परिवार के लिए जी जान न्योछावर करती रही कभी उसने उफ़ तक नहीं की शादी होके आई थी तो ज़्यादा उम्र नहीं थी उसकी, काम काज में भी उतनी अच्छी नहीं थी पर सबकुछ पहली बार करते हुए कब पारंगत हो गई ये मुझे ही नहीं पता चला जी हाँ मै जो उसके पड़ोस में ही रहती थी ,कहने को तो राधा मुझे भाभी कहती है ,पर मै उसे सहेली समझती हूँ वो भी कभी कुछ नहीं छुपाती मुझसे पर आजकल उसके पास मेरे पास बैठने का वक़्त ही कहाँ रहता है वो सुबह से खाना पीना बनाकर ऑफिस जो चली जाती है फिर वही शाम को आती है और फिर रात के खाने में लग जाती है पर शायद सिर्फ बनाती है खुद ढंग से खाती नहीं है बिलकुल सूख के काँटा हो गई है, अभागिन को तो पति भी ऐसा मिला है कभी उसकी सुध ही नहीं लेता एक छत के नीचे रहते हुए भी मानो कोई अजनबी हो या कहलो वो मालिक हो और राधा उसकी गुलाम बस गुलामी करवाने को ब्याह के लाया था इतने बड़े घर की नाज़ों पली बिटिया। हो गया कहैं भी तो हैं के दुलारी के खुआरी होत है ,सो राधा भी इसी कारण बर्बाद हो गई होगी।
राधा का एक बेटा है मेरी तो आस उसी से बंधी है अब उसकी पढाई भी पूरी हो गई है तो शायद अब जल्दी माँ को सुख दे दे मैं इंतज़ार में ही थी इस ख़ुशख़बरी के लिए कि एक दिन राधा ऑफिस का बैग लटकाए दौड़ते हुए मेरे पास आई कहने लगी चाची अविनाश की नौकरी लग गई है लो मिठाई खाओ ,मैंने उसे बताया अरे मै कबसे यही प्रार्थना कर रही थी भगवान से कि तू जल्द से जल्द आराम से बैठकर चैन से खाना खाए अब तेरा बेटा तुझे सुख दे ,राधा ने कहा हाँ भाभी बस कुछ ही दिनों की बात है फिर हम दोनों खूब गप्पे लगाएँगे धूप में चारपाई डालकर चाय पिएंगें और ठंड का मज़ा लेंगे, इतना कहकर हँसते -हँसते वो चली गई।
कुछ दिन बीत गए पर राधा का ऑफिस जाना न छूटा , उसका वही रोटीन रहा ,एक दिन मै शाम को उसके घर पहुँची तो ,देखा राधा थकी हारी आकर खाना बना रही है और अविनाश उससे झिल्लाकर बात कर रहा है आप मुझे ये न कहा करो वो न कहा करो वगैरह वगैरह राधा भी खाना बनाते से उठकर मेरे पास आकर अविनाश से बोली खाना खा लो ,तो उसने ग़ुस्से से ही जवाब दिया खाना मै खा लूँगा बाहर से आप मेरे पीछे मत पड़ो और बाहर चला गया ,मैंने राधा से पूछा ये अविनाश को क्या हुआ राधा बात टालते हुए बोली नहीं भाभी कुछ नहीं बस ऐसे ही उसे कुछ अच्छा खाना ,खाना होगा इसीलिए बाहर से खाने को कह रहा है ,आप छोड़ो चाय पियोगी ? मैंने कहा नहीं तुझे देर हो जाएगी ऑफिस को तू तैयार होजा मै जा रही हूँ फिर आऊँगी।
मै वहाँ से चली तो आई पर मेरा मन जैसे राधा के पास ही रह गया वो शायद पहली बार मुझसे कुछ छुपा रही थी ,कुछ दिन बाद ही अविनाश की शादी की खबर राधा ने सुनाई मैंने कहा अरे राधा इतनी जल्दी भी क्या है तो बोली भाभी अविनाश को लड़की पसंद है और लड़की वालों को जल्दी है फिर मुझे भी लड़की अच्छी लगी है तो देर क्या करना ,मैंने कहा अच्छा फिर तो ठीक है। राधा खूब ज़ोर -शोर से शादी की तैयारियों में जुट गई और बड़ी धूम धाम से अविनाश की शादी कराई लगता था मानों सारी जमा पूँजी लुटा दी हो ,आज एक महीना बीत गया शादी को, मुझे लगा अब तो राधा ने नौकरी छोड़ दी होगी पर वो फिर एक दिन बैग टाँगे ऑफिस चल दी कहने लगी छुट्टियाँ ख़त्म हो गई हैं।
मेरे मन में ये बात कहीं खटक रही थी कि अब राधा को काम करने की क्या ज़रूरत आखिर अविनाश नौकरी कर तो रहा है ! पर एक दिन मुझे मेरे मन में चल रहे सवालों का जवाब मिल गया जब अविनाश अपनी बीवी को लेकर दूसरे शहर चल दिया। राधा के ऊपर अब बेटे की ज़िम्मेदारी नहीं थी पर उसे पति को अब भी खिलाना था इसलिए बूढी हो चुकी राधा अब भी जवान बनी रही सुबह से घर की ड्यूटी निभाती फिर ऑफिस की, आराम तो जैसे उसकी क़िस्मत में था ही नहीं।
दिन बीतते गए और एक दिन मैंने राधा के रोने की आवाज़ सुनी मै पहुँची तो कहने लगी भाभी मेरी एक और ज़िम्मेदारी ख़त्म हो गई एक काम और ख़त्म हो गया भाभी अब मै क्या करूँ कौन मुझे अब चिल्लाएगा कौन मुझसे खाना माँगेगा यही भर तो था जो मेरे हाँथ का बना खाना ,खाना चाहता था। मैंने उसे गले से लगा लिया ,राधा का पति परलोक सिधार गया था , कुछ देर बाद राधा ने आंसू पोंछे और जुट गई अंतिम संस्कार करने में, मै उसके साथ ही साथ थी पर ऐसा लगता था आज उसे किसी साथ की ज़रूरत नहीं रही। ख़बर पाकर अविनाश भी पहुँचा पर माँ -बेटे ने आपस में कोई बात नहीं की।
कई दिन बाद राधा मेरे घर आई मै बड़ी खुश हो गई कि चलो आज तो इसे टाइम मिला मैंने कहा अरे राधा बैठ आ खाना खा ले तो बोली मुझे भूख नहीं है आप खा लो, मैंने कहा अरे ऐसे कैसे चल आ और ज़बरदस्ती मैंने उसे खाना खिला दिया और बातों ही बातों में उससे पूछा अब क्या करेगी तो कहने लगी सोचती हूँ ,नौकरी छोड़ के कुछ छोटा मोटा काम शुरू कर दूँ अब क्या करुँगी ज़्यादा पैसा भी ,थोड़ा बहोत भी कमाऊंगी तो गुज़ारा हो जाएगा। ये सुनकर मैंने कहा तू छोड़ अब काम -वाम करना तेरे भइया हैं न ये कह रहे थे कि राधा को कह दो वो यहीं आकर रहे और काम वाम करना छोड़े , तो वो मुस्कुरा दी और बोली अरे भाभी ऐसे थोड़ी अच्छा लगता है।
इतने में मेरा अनुज आ गया और राधा को चाची कहकर पैर छुए और कहने लगा हाँ चाची आप हमारे साथ रहो मै क्या आपका बेटा नहीं हूँ! ये सुनते ही राधा की आँखों से आँसू छलक पड़े कहने लगी अविनाश ने तो मुझे अपने साथ चलने को नहीं कहा वो तो चला गया मुझे छोड़कर और रोते -रोते अनुज के गले लग गई बस तबसे राधा हमारे साथ है और आज हम सब अनुज के लिए लड़की देखने जा रहे हैं, कहता है चाची जिससे कहेंगीं , उसी से शादी करूँगा मैंने भी कह दिया, ठीक है इसी बहाने मुझे भी अच्छी बहू मिल जाएगी ह-ह- हा।

