‘Ghooskhor Pandat’ Film Title पर बवाल, FWICE को नाम से दिक्कत

Ghooskhor Pandat’ Film Title पर बवाल, FWICE को नाम से दिक्कत

नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म के Film Title को लेकर इंडस्ट्री में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ‘Ghooskhor Pandat’ नाम सामने आते ही कई संगठनों ने इसे एक आपत्तिजनक टाइटल बताया। सिने वर्कर्स की प्रमुख संस्था FWICE ने इस शीर्षक पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे बदलने की मांग की है।

FWICE ने Film Title को बताया अपमानजनक

फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने आधिकारिक रूप से इस Film Title पर नाराज़गी जताई है। संगठन का ऐसा कहना है कि टाइटल में उपयोग किया शब्द एक विशेष समुदाय और पारंपरिक पहचान को नेगेटिव तरीके में दिखाते हैं। FWICE ने इसे सामाजिक सदभाव के लिए नुकसानदायक बताते हुए OTT प्लेटफॉर्म्स से भी इस पर ध्यान देने की अपील की है। संगठन का ऐसा तर्क है कि फिल्म इंडस्ट्री की ऐसी जिम्मेदारी है कि वह ऐसे नामों से बचे जो किसी जाति, पेशे या समुदाय को गलत तरीके से प्रस्तुत करते है।

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शब्दों के अर्थ से बढ़ी संवेदनशीलता

विवाद की जड़ इस Film Title में इस्तेमाल हुए दो शब्दों को माना जा रहा है। ‘Ghooskhor’ का सामान्य अर्थ रिश्वत लेने वाला व्यक्ति होता है, जबकि ‘Pandat’ शब्द ‘Pandit’ से जुड़ा माना जा रहा है, जो एक सामाजिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा हुआ है। आलोचक का कहना है कि इन दोनों शब्दों का संयोजन एक निगेटिव संदेश देता है, जिससे लोगों की भावनाएं काफी आहत हो सकती हैं। इसी आधार पर विभिन्न प्रकार सामाजिक संगठनों ने भी विरोध दर्ज कराया है।

विरोध, शिकायतें और कानूनी पहलू

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ जगहों पर इस Film Title के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए हैं। उत्तर प्रदेश में शिकायत दर्ज होने की भी खबर सामने आई है, जिसमें आरोप लगाया गया कि शीर्षक से सामाजिक और धार्मिक भावनाएं काफी प्रभावित हुई हैं। कुछ संगठनों ने इसे लेकर कड़ी कार्रवाई की भी मांग की है और कुछ ने तो फिल्म डायरेक्टर्स से शीर्षक को बदलने की अपील की है।

निर्माताओं और कलाकारों की सफाई

फिल्म के निर्माता-लेखक नीरज पांडे ने स्पष्ट रूप से बताया है कि Film Title का किसी जाति, धर्म या पेशे से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार ‘Pandat’ एक काल्पनिक पात्र का नाम है और कहानी केवल एक व्यक्ति के चरित्र पर ही केंद्रित है। मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी भी एक समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि यह एक किसी व्यक्ति की कहानी है। विवाद बढ़ने के बाद प्रमोशनल चीज़ें अस्थायी रूप से हटा ली गई है।

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फिल्म शीर्षकों पर बढ़ती सामाजिक सतर्कता

यह मामला दिखाता है कि आज के समय में Film Title केवल एक क्रिएटिव निर्णय नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता से भी जुड़ गया है। भारत जैसे बड़े देशों में शब्दों का चयन करते हुए हमें किसी फिल्म का टाइटल बनाना चाहिए। ‘Ghooskhor Pandat’ को लेकर उठा विवाद इस बात का संकेत है की देखने वाले लोग फिल्म के टाइटल को गंभीरता से लेते हैं।

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