रीवा: मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय का गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग अब प्रदेश के एक बड़े ‘एडवांस्ड इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी’ केंद्र के रूप में उभर रहा है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने आज स्वयं विभाग का औचक निरीक्षण कर यहाँ हो रहे अत्याधुनिक कार्यों का जायजा लिया और डॉक्टरों की टीम द्वारा कम समय में हासिल की गई बड़ी उपलब्धियों की जमकर सराहना की।
विभाग में अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में जो आमूलचूल परिवर्तन आया है, उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज एक माह के भीतर यहाँ 61 से अधिक बेहद जटिल और जीवन-रक्षक प्रक्रियाएं (Procedures) सफलतापूर्वक संपन्न की गई हैं। उपमुख्यमंत्री की विशेष पहल पर विभाग को उन्नत ईआरसीपी (ERCP), एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS), कोलैन्जियोस्कोपी और लिथोट्रिप्सी जैसी मशीनों से लैस किया गया है। इन आधुनिक तकनीकों की मदद से अब सक्रिय रक्तस्राव (Active Bleeding) जैसे गंभीर मामलों में भी समय पर ‘एंडोस्कोपिक हीमोस्टेसिस’ कर मरीजों को मौत के मुंह से बाहर निकाला जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इन विश्वस्तरीय सुविधाओं के शुरू होने से अब विंध्य के मरीजों को इलाज के लिए नागपुर, दिल्ली या अन्य महानगरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। इससे न केवल मरीजों पर पड़ने वाला भारी-भरकम आर्थिक बोझ कम हुआ है, बल्कि रेफरल में होने वाले समय की बर्बादी रुकने से जान जाने का जोखिम भी न्यूनतम हो गया है। वर्तमान में यह विभाग अपनी अधिकतम कार्य क्षमता के साथ संस्थान में ही उच्च स्तरीय सेवाएं प्रदान कर रहा है, जो प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया है।

