अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को राम मंदिर के प्रशासन में बड़ा बदलाव किया है। ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला CEO नियुक्त किया है। जीतेंद्र मिश्रा वायुसेना में करीब 39 साल तक सेवाएं दे चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान की कमान संभाली थी। उनके सैन्य अनुभव को देखते हुए राम मंदिर के बढ़ते प्रशासन और बड़े स्तर के संचालन की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है।
3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी
जीतेंद्र मिश्रा का जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में हुआ था। जीतेंद्र मिश्रा मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता लेक्चरर की नौकरी करते थे। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना में कमीशन किया गया था। करीब चार दशक की अपनी सेवा में उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी है। उन्होंने 18 से ज्यादा प्रकार के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाने का अनुभव हासिल किया है।
उनका पूरा परिवार दिल्ली में रहता है। परिवार में पत्नी सरिता सिंह, एक बेटा और एक बेटी हैं। सरिता सिंह एयरफोर्स वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (AFWWA) की अध्यक्ष रही हैं। पिता नथुनी मिश्रा दिल्ली यूनिवर्सिटी में कॉमर्स के प्रोफेसर थे। जीतेंद्र मिश्रा के छोटे भाई डॉ. देवेंद्र मिश्रा दिल्ली में ही एक मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक पद पर हैं, वहीं बहन डॉ. वंदना मिश्रा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रोफेसर हैं।
वायु सेना में बड़े पदों पर रहे हैं
जीतेंद्र मिश्रा का कमीशन 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना में हुआ था। अपनी 38 साल की सेवा में उन्होंने सेना के कई बड़े पदों पर अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने एक सामान्य फाइटर पायलट ही नहीं, बल्कि फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट कमांडेंट के तौर पर भी काम किया है।
जीतेंद्र मिश्रा ने Aircraft and Systems Testing Establishment के कमांडेंट के तौर पर, Air Headquarters में Operational Planning and Assessment Group के डायरेक्टर, 15 Wing, बरेली के कमांडर, 18 Wing, पठानकोट के कमांडर, Deputy Chief, Integrated Defence Staff (Doctrine, Organisation & Training) और Deputy Chief, Integrated Defence Staff (Operations) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी भूमिका निभाई है।
कारगिल में भी रही महत्वपूर्ण भूमिका
जीतेंद्र मिश्रा कारगिल युद्ध का भी हिस्सा रहे हैं। वह उस टीम का हिस्सा थे, जिसने Laser Guided Bombs को ऑपरेशनल किया था। बाद में इन हथियारों का इस्तेमाल टाइगर हिल और मुनथो ढालो जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हुए हमलों में किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका
जीतेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान की कमान संभाली थी। इसके लिए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल भी दिया गया है। 1 जनवरी 2025 को उन्होंने भारतीय वायु सेना के Western Air Command के Air Officer Commanding-in-Chief (AOC-in-C) का पद संभाला। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी उनके पास थी।
ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका के लिए उन्हें Sarvottam Yudh Seva Medal (SYSM) से सम्मानित किया गया। इससे पहले उन्हें Ati Vishisht Seva Medal (AVSM) और Vishisht Seva Medal (VSM) भी मिल चुके हैं।
क्यों चुने गए जीतेंद्र मिश्रा?
जीतेंद्र मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। जीतेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया, उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति का उत्तर प्रदेश से भी सीधा कनेक्शन है।
प्रशासन और सुरक्षा का अनुभव
जीतेंद्र मिश्रा करीब चार दशक तक वायुसेना में रहे और कई महत्वपूर्ण कमांड संभालीं। राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और बड़े स्तर के प्रशासनिक कामकाज में उनका सैन्य अनुभव उपयोगी माना जा रहा है।
CEO के रूप में उनकी जिम्मेदारियां
जीतेंद्र मिश्रा की CEO के तौर पर मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था और संचालन को सुचारु रूप से बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी। यहां उनका कार्य मंदिर के धार्मिक मामलों से नहीं, बल्कि प्रशासनिक मामलों से जुड़ा होगा। इसमें मुख्य तौर पर मंदिर की रोज की व्यवस्था, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय, बड़े आयोजनों के दौरान प्रशासन की मुस्तैदी आदि जैसे काम उनके जिम्मे होंगे। अगर आसान भाषा में कहें तो धार्मिक नेतृत्व अलग होगा और CEO मंदिर के विशाल प्रशासनिक तंत्र के जिम्मेदार होंगे।
कौन हैं जीतेंद्र मिश्रा?
- सैन्य पृष्ठभूमि: उन्होंने भारतीय वायुसेना (IAF) में लगभग चार दशकों (39 वर्ष) तक देश की सेवा की और अप्रैल 2026 में एयर मार्शल के पद से सेवानिवृत्त (रिटायर) हुए।
- फ्लाइंग अनुभव: उनके पास 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है और उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू व परिवहन विमानों को उड़ाया है।
- सम्मान: देश की सेवा के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) जैसे प्रतिष्ठित पदकों से सम्मानित किया जा चुका है।
कारगिल युद्ध से जुड़ाव
- 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, स्क्वाड्रन लीडर के रूप में जीतेंद्र मिश्रा ने मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों (Laser-Guided Bombs) को ऑपरेशनल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- इन हथियारों और रणनीतियों का उपयोग टाइगर हिल जैसे सामरिक ठिकानों पर दुश्मनों के खिलाफ प्रभावी ढंग से किया गया था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भूमिका
- हालिया वर्षों में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान (Western Air Command) के प्रमुख के रूप में हवाई अभियानों और रणनीतिक हमलों का नेतृत्व किया था।
- पाकिस्तान के खिलाफ इस आक्रामक और सटीक सैन्य कार्रवाई में उनकी भूमिका को बेहद अहम माना गया है।
राम मंदिर के CEO के रूप में जिम्मेदारी
- चयन प्रक्रिया: इस पद के लिए देश भर से 5,000 से अधिक आवेदन आए थे, जिनमें AI-आधारित स्क्रीनिंग और कई दौर के साक्षात्कारों के बाद उनका चयन किया गया।
- नई प्रशासनिक व्यवस्था: मंदिर में चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़ी हालिया घटनाओं के बाद ट्रस्ट ने प्रशासन को पारदर्शी, अनुशासित और अधिक पेशेवर बनाने का फैसला किया।
- अब जीतेंद्र मिश्रा मंदिर परिसर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, वित्त और रोजाना के प्रशासनिक कामकाज की पूरी कमान संभालेंगे।

