Secret Life formula’s of Bhagavad Gita In Hindi: गीता एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं और जीवन संघर्षों के बीच एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। संपूर्ण गीता अपने आप में एक रहस्य है, जिसमें जीवन जीने की बहुत सारे गूढ़ रहस्य और सूत्र छुपे हैं, लेकिन उनमें से पांच सूत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है, अगर इसे मनुष्य जीवन में उतार ले, जीवन में बहुत सफलता प्राप्त कर सकता है, क्या हैं ये जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्र।
क्या है श्रीमद्भगवद्गीता
महाभारत युद्ध के प्रारंभ होने से पहले भगवान श्रीकृष्ण को उपदेशों के माध्यम से उनके कर्तव्यपरायणता का बोध करवाया था, यही श्रीमद्भागवद्गीता के नाम से जाना जाता है, यह महाभारत के भीष्मपर्व का हिस्सा माना जाता है, इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। श्रीमद्भागवद्गीता की गणना प्रस्थानत्रयी में की जाती है, अन्य दो ग्रंथ ब्रमहसूत्र और उपनिषद होते हैं। तीन ग्रंथों के सामूहिक रूप को ही प्रस्थानत्रयी कहा जाता है, जिसमें प्रवृत्ति और निवृत्ति दोनों मार्गों का तात्विक विवेचन किया जाता है, ये त्रयी ग्रंथ वेदांत दर्शन के प्रमुख तीन स्तंभ माने जाते हैं। अर्थात गीता का स्थान हिंदू धर्म में वही है जो उपनिषदों का है।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को क्यों दिया गीता का उपदेश
प्राचीन समय में जब राज्याधिकार के लिए कौरवों और पांडवों के मध्य युद्ध हो रहा था, युद्ध में सम्मुख अपने पितामह, भाई-बांधवों, गुरुजन और परिवार जनों को देखकर महाबाहु पांडव कुमार अर्जुन युद्ध के लिए इंकार कर देते हैं, उनके मन में वैराग्य होंने लगता और वह अपने कर्तव्य से विमुख होंने लगते हैं, तब उनके सारथी बने भगवान श्रीकृष्ण उन्हें, धर्म-कर्म और ज्ञान की सच्ची शिक्षा देते हैं और उन्हें जीवन सत्य से अवगत कराते हैं, भगवान श्रीकृष्ण के इन्हीं उपदेशों को श्रीमद्भगवद्गीता नाम के ग्रंथ के रूप में जाना जाता है।
गीता में छुपे पांच प्रमुख जीवन सूत्र
वैसे तो समस्त गीता का अध्ययन ही मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है, आइए जानते हैं गीता के प्रमुख सिद्धांतों के बारे में, जिनका अमल मनुष्य कर ले तो उसका जीवन बदल सकता है-
कर्म योग- गीता में कर्म योग को जीवन के सफलता के लिए आवश्यक माना गया है। यह योग हमें अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है। मनुष्य को कर्मयोगी होना चाहिए, भाग्य के सहारे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि जीवन में सार्थकता और सफलता के लिए हमेशा कर्म करते रहना चाहिए।
भक्ति योग- गीता में भक्ति योग को जीवन के सफलता के लिए आवश्यक माना गया है। यह योग हमें भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण के लिए प्रेरित करता है। यह एक आध्यात्मिक मार्ग है जो किसी देवता के प्रति मनुष्य की व्यक्तिगत प्रीति और दर्शन का परिचायक होता है।
ज्ञान योग- गीता में ज्ञान योग को जीवन के सफलता के लिए आवश्यक माना गया है। यह योग हमें जीवन के सच्चे अर्थ को समझने के लिए प्रेरित करता है। वास्तव में यह मनुष्य द्वारा खुद को ही जानने का प्रयास होता है, अर्थात आत्मज्ञान को प्राप्त करना जीवन की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।
आत्म-संयम- गीता में आत्म-संयम को जीवन के सफलता के लिए आवश्यक माना गया है। यह हमें अपने इंद्रियों को नियंत्रित करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं, यदि मनुष्य जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है, तो उसे आत्म नियंत्रण का ज्ञान होना अत्यंत जरूरी होता है, यह ज्ञान मनुष्य को जीवन में आगे बढ़ाने के लिए अत्यंत जरूरी होता है।
निष्काम कर्म- गीता में निष्काम कर्म को जीवन के सफलता के लिए आवश्यक माना गया है। यह हमें अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है, बिना किसी फल की अपेक्षा के। भगवान गीता में कहते भी हैं मनुष्य को निष्काम कर्मयोगी होना चाहिए, अर्थात बिना किसी फल के कर्म करते ही रहना चाहिए, क्योंकि फल की इच्छा को ध्यान में रख कर कार्य करने के कारण मनुष्य जीवन में यथार्थ सफलता नहीं प्राप्त कर सकते हैं।