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MF में करना है पहली बार निवेश! जान लीजिए ये बातें, बन जाओगे करोड़पति

Mutual fund sign with stacked coins and rolled currency notes symbolizing stable long-term investingMutual fund sign with stacked coins and rolled currency notes symbolizing stable long-term investing

First Time Investment in Mutual Funds: म्यूचुअल फंड आज के समय में बहुत पॉपुलर है. लेकिन MF में निवेश की शुरुआत करना कई बार उलझन भरा हो सकता है. जी हां आपको बता दें कि, सोशल मीडिया की सलाहों के बीच अक्सर निवेशक सही फंड चुनने में गलती कर देते हैं. गौरतलब है कि एक्सपर्ट्स के हिसाब से निवेश की शुरुआत रिटर्न देखने के बजाय अपने लक्ष्यों और जोखिम सहने की क्षमता को समझकर करनी चाहिए.

चलिए आज आपको ऐसे फॉर्मूला को बताने वाले हैं जो एक्सपर्ट का सुझाया हुआ है जी हां अगर आप भी पहली बार निवेश कर रहे हैं, तो 50-30-20 का नियम और सही एसेट एलोकेशन आपकी वेल्थ क्रिएशन की राह आसान बना सकता है.

क्या है 50-30-20 का गोल्डन रूल?

वित्तीय जानकारों की मानें तो एक सफल निवेशक बनने के लिए अनुशासन बेहद आवश्यक है. इसके लिए 50-30-20 का नियम सबसे बेहतर है. आपको बता दें इसका मतलब अपनी पुरी कमाई का 50% हिस्सा जरूरी खर्चों पर, 30% हिस्सा अपनी इच्छाओं पर और कम से कम 20% हिस्सा बचत व निवेश के लिए रखना चाहिए. ये नियम सुनिश्चित करता है कि आपके पास भविष्य के लक्ष्यों के लिए पर्याप्त फंड जमा हो सके.

टाइम के हिसाब से तय करें इक्विटी और डेट का हिस्सा साथ ही म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सबसे जरूरी बात ये है कि आप पैसा कितने समय के लिए निवेश कर रहे हैं.

कितने टर्म के लिए निवेश कर रहे हैं पैसा

शॉर्ट टर्म: यहां रिस्क कम होना चाहिए. पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा 30% तक ही रखें और ज्यादा फोकस डेट फंड्स पर करें.
मीडियम टर्म: यहां इक्विटी का हिस्सा 30% से 60% के बीच रखा जा सकता है.
लॉन्ग टर्म: लंबे समय के लिए आप स्मॉल-कैप या मिड-कैप जैसे रिस्की लेकिन हाई-रिटर्न वाले फंड्स में ज्यादा पैसा लगा सकते हैं.

मार्केट की उठापटक से बचें

अब सबसे अहम बात यह है कि, शुरुआती निवेशकों को लार्ज-कैप या इंडेक्स फंड से शुरुआत करनी चाहिए, क्योंकि ये कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं. एक ही कैटेगरी के बहुत सारे फंड रखने से बचें, इससे ओवरलैपिंग बढ़ती है और कोई खास फायदा नहीं होता. साथ ही बाजार गिरने पर घबराकर अपनी SIP बंद ना करें. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि मार्केट करेक्शन के समय निवेश जारी रखने से रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है, जो लंबे समय में आपकी लागत घटाता है और मुनाफा बढ़ाता है.

निवेश से पहले करें ये काम

जब भी आप निवेश करने की सोचें या फंड का चयन कर रहे हों तो आपको सबसे पहले फंड्स की सारी जानकारी ले लेना चाहिए की फंड कैसा परफॉर्म कर रहा है उसका पिछला रिकार्ड कैसा है. यदि आप रिसर्च नहीं कर पा रहे हैं तो आप किसी वित्तीय जानकार की मदद ले सकते हैं.

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