मध्य प्रदेश के रीवा जिले में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के निज निवास पर हाल ही में हुए यूथ कांग्रेस के उग्र प्रदर्शन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़कर डिप्टी सीएम के निज निवास के अंदर तक जा पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने कार्यालय के भीतर जमकर हंगामा किया और वहां रखी कुर्सियों में तोड़फोड़ की।
इस घटनाक्रम के संबंध में डिप्टी सीएम के परिवार और कार्यालयीन स्टाफ की ओर से बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी अपने चेहरे ढककर अंदर घुसे थे और उनके हाथों में काले रंग का स्प्रे था। आरोप है कि इस स्प्रे को वहां मौजूद कर्मचारियों और स्टाफ की आंखों में डालने का कुत्सित प्रयास किया गया, जिससे कार्यालय में हड़कंप मच गया। इस अप्रत्याशित और डरावने घटनाक्रम के बाद से डिप्टी सीएम के निवास पर तैनात कर्मचारियों और स्टाफ सदस्यों में भारी दहशत और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
घटना के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकर्ता और समर्थक एकजुट होकर रीवा के आईजी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। बीजेपी नेताओं का स्पष्ट रूप से कहना है कि लोकतंत्र में सभी को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने या विरोध जताने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी के निजी आवास में बलपूर्वक घुसकर हंगामा करना, तोड़फोड़ मचाना और कर्मचारियों के साथ अभद्रता करना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इस प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 15 लोगों के खिलाफ नामजद और अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। वर्तमान में पुलिस मौके पर मौजूद वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की सूक्ष्मता से जांच कर रही है ताकि सभी आरोपियों की संलिप्तता का पता लगाया जा सके।
फिलहाल, इस पूरी घटना को लेकर रीवा जिले की सियासत पूरी तरह से गरमाई हुई है। विपक्षी दल कांग्रेस का तर्क है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह से जनहित के मुद्दों से जुड़ा हुआ था और जनता की आवाज उठाने के लिए किया गया था, जबकि सत्तारूढ़ दल बीजेपी इसे कानून-व्यवस्था, शिष्टाचार और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने वाला एक गंभीर आपराधिक मामला बता रही है। हालांकि विरोध प्रदर्शन को लोकतंत्र का एक आवश्यक हिस्सा माना जाता है, लेकिन किसी के निजी आवास में घुसकर तोड़फोड़ करने के आरोप बेहद संगीन हैं। अब पुलिस और प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसकी क्या और कितनी भूमिका थी।

