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सीधी में सिस्टम की क्रूरता: इलाज के अभाव में दम तोड़ा, एम्बुलेंस नहीं मिली तो स्कूटी पर लादकर ले गए पिता का शव

Father's body taken on scooter after ambulance not availableFather's body taken on scooter after ambulance not available

Father's body taken on scooter after ambulance not available

Father’s body taken on scooter after ambulance not available: मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम की बदहाली की एक रूह कंपा देने वाली तस्वीर सीधी जिले के सेमरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई है। यहाँ बुधवार रात मानवता उस वक्त शर्मसार हो गई जब एक बेटे को अपने पिता का शव कंधे के सहारे स्कूटी पर बांधकर घर ले जाना पड़ा। मृतक के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर डॉक्टर नहीं मिले, जिससे मरीज ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया और मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव वाहन तक उपलब्ध कराने की जहमत नहीं उठाई।

डॉक्टर के इंतजार में उजड़ गया सुहाग
जानकारी के अनुसार, ग्राम निवासी रामसजीवन गुप्ता की बुधवार रात करीब 11 बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। परिजन उम्मीद के साथ उन्हें तत्काल सेमरिया अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां का नजारा देख उनके होश उड़ गए। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर संजय पटेल मौके से नदारद थे। मृतक के बेटे संजीव और बेटी अपने पिता की जान बचाने के लिए अस्पताल के गलियारों में डॉक्टरों और स्टाफ को ढूंढते रहे, गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली। इसी अफरा-तफरी के बीच रामसजीवन ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। पिता की मौत होते ही अस्पताल परिसर महिलाओं की चीख-पुकार से दहल उठा।

स्कूटी बनी ‘शव वाहन’, महिलाएं चीखती रहीं
हृदयविदारक स्थिति तब पैदा हुई जब मौत के बाद परिजनों ने शव को घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस या शव वाहन की मांग की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने साफ मना कर दिया। मजबूरी और लाचारी में बेटों ने अपने पिता के पार्थिव शरीर को स्कूटी के बीच में फंसाया और उसे पकड़कर घर के लिए रवाना हुए। इस मंजर को जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं। एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ आधी रात को एक परिवार अपने मृत पिता के सम्मान के लिए सड़क पर संघर्ष करता नजर आया।

डिनर का बहाना और प्रशासनिक लापरवाही
इस गंभीर लापरवाही पर जब ड्यूटी डॉक्टर संजय पटेल से सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। डॉक्टर ने सफाई देते हुए कहा कि वे उस समय खाना खाने (डिनर) के लिए अपने कमरे में गए थे और उन्हें मरीज के आने की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। वहीं, मृतक के बेटे संजीव का स्पष्ट कहना है कि यदि डॉक्टर अपनी सीट पर होते, तो उसके पिता आज जिंदा होते। यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि ग्रामीण इलाकों में गरीब जनता भगवान भरोसे है। फिलहाल, इस शर्मनाक घटना का वीडियो और जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

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