ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान पाकिस्तान की लॉबिंग और ट्रंप (Donald Trump) के दावों पर और जानकारी सामने आई है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के FARA (Foreign Agents Registration Act) दस्तावेजों से साफ है कि पाकिस्तान (Pakistan) ने भारत के हमले से इतना डर गया था कि उसने अमेरिका में भारी लॉबिंग की – 6 फर्म्स हायर कीं और करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए।
लेकिन इन दस्तावेजों में ट्रंप के किसी दखल का जिक्र नहीं है, जो उनके सीजफायर (Ceasefire) कराने के दावों को फर्जी साबित करता है। ट्रंप ने कई बार कहा कि उन्होंने ही संघर्ष रुकवाया, लेकिन रिकॉर्ड्स से यह झूठ लगता है
पाकिस्तान डरा हुआ था
ऑपरेशन सिंदूर 6-10 मई 2025 के बीच चला, जिसमें भारत ने पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक्स की। पाकिस्तान की रिएक्शंस से साफ है कि वह बुरी तरह डर गया था:
- तुरंत रिटेलिएशन की धमकी लेकिन एक्शन नहीं: पाक PM शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने भारत के अटैक को “cowardly act of war” कहा और रिटेलिएशन की धमकी दी, लेकिन कोई बड़ा कदम नहीं उठाया। यह डर का इंडिकेटर है, क्योंकि पाकिस्तान ने एस्केलेशन से बचने की कोशिश की।
- अमेरिका से 60 बार गुहार: FARA दस्तावेजों से पता चला कि पाकिस्तान ने ईमेल, फोन और मीटिंग्स के जरिए 60 बार अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया, ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन तक पहुंच बनाने के लिए। यह डर का स्पष्ट सबूत है, क्योंकि पाकिस्तान ने मिलिट्री स्ट्रेंग्थ से ज्यादा डिप्लोमैसी पर भरोसा किया।
- क्राइसिस में पाकिस्तान का व्यवहार: रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पाकिस्तान ने एस्केलेशन से बचने के लिए अमेरिका से मेडिएशन की गुहार लगाई, जो उसके डर को दिखाता है. कश्मीर और बॉर्डर पर पाकिस्तान की फोर्सेस अलर्ट पर थीं, लेकिन कोई काउंटर-अटैक नहीं किया, जो भारत की स्ट्राइक से सहमे होने का संकेत है।
FARA में ट्रंप का दखल न होना: ट्रंप के दावे फर्जी क्यों?
FARA दस्तावेजों में पाकिस्तान की लॉबिंग का डिटेल है, लेकिन ट्रंप के किसी पर्सनल या ऑफिशियल दखल का जिक्र नहीं।ट्रंप ने कई बार क्लेम किया कि उन्होंने ही सीजफायर कराया – जैसे उन्होंने कहा “proud” कि US ने मदद की। लेकिन भारत के PM मोदी ने साफ कहा कि कोई US मेडिएशन नहीं थी. कांग्रेस ने ट्रंप के इन दावों को 50 बार दोहराने पर सवाल उठाया, और रिपोर्ट्स से लगता है कि यह प्रोपगैंडा था। ARA में ट्रंप का नाम न होना साबित करता है कि उनके दावे फर्जी थे – शायद पॉलिटिकल क्रेडिट लेने के लिए।

