नहीं रहीं मशहूर अभिनेत्री कामिनी कौशल

KAAMINI (1)

Actress Kamini Kaushal Passes Away : बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस कामिनी कौशल 98 साल की उम्र में हमें छोड़ कर चली गईं। अपने 7 दशक से भी ज़्यादा लंबे करियर में उन्होंने बड़े बेमिसाल और मुख्तलिफ़ किरदार निभाए और और भारतीय सिनेमा में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

16 जनवरी, 1927 को लाहौर में पैदा हुईं कामिनी कौशल का बचपन का नाम उमा कश्यप था ,दो भाइयों और तीन बहनों में वो सबसे छोटी थीं और केवल सात बरस की थीं तब भारतीय वनस्पति विज्ञान के “जनक” कहे जाने वाले उनके पिता प्रोफेसर शिव राम कश्यप गुज़र गए। पिता के इस दुनिया से जाने के बाद कामिनी जी ने ,10 साल की उम्र में खुद का कठपुतली थिएटर बनाया, आकाशवाणी पर कई रेडियो नाटक किए ,जिनमें फिल्म निर्माता चेतन आनंद ने उन्हें सुना और उनकी आवाज़ की अदाकारी से इतना मुतासिर हुए कि फिल्म ‘नीचा नगर’ ऑफर कर दी और उमा को आपने ही नाम दिया “कामिनी” नाम बदलने के पीछे एक वजह ये भी थी कि उनकी पत्नी का नाम भी उमा था और वो भी इस फिल्म में काम कर रहीं थीं तो दोनों को पुकारने में आसानी हो इसलिए ये करना उन्हें ज़रूरी लगा।

पहली फिल्म ने जीता कान फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड :-

गोल्डन पाम’ पुरस्कार प्राप्त करने वाली ,साल 1946 में आई फिल्म ‘नीचा नगर’ पहली भारतीय फिल्म बनी, जिसने कान फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड जीता और पाल्मे डी ओर पुरस्कार जीतने वाली एकमात्र भारतीय फिल्म बनी। 29 सितंबर 1946 को फ्रांस के कान अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में इसका पहला प्रदर्शन हुआ। चेतन आनंद के निर्देशन में बनी ये पहली फिल्म भी थी।

‘नीचा नगर’ फिल्म में काम करने के बाद, कामिनी जी लाहौर लौट आईं, लेकिन इस फिल्म में जो उन्होंने अदाकारी के जलवे बिखेरे , वो लाहौर तक पहुँचे और उन्हें इतने फिल्मों के ऑफर मिलने लगे कि उन्हें बार – बार मुंबई आना पड़ा इसी बीच आपने 1948 में अपने बहनोई बीएस सूद से शादी कर ली और फिर बम्बई में ही बस गईं क्योंकि उनकी बड़ी बहन की अचानक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी और वो अपने पीछे दो बेटियाँ छोड़ गईं थीं।आज उनकी एक बेटी कुमकुम सोमानी ने बच्चों के लिए गांधी के दर्शन पर एक किताब लिखी है और दूसरी बेटी कविता साहनी भी एक आर्टिस्ट हैं। कामिनी जी के भी तीन बेटे हैं ,राहुल, विदुर और श्रवण।

20 साल की उम्र में मिला स्टारडम:-

साल 1946 में फिल्म ‘नीचा नगर’ नगर से बॉलीवुड में क़दम रखने वाली कामिनी जी ने जब इस फिल्म में ‘रूपा ‘का किरदार निभाया ,तब वो महज़ बीस बरस की थीं। इस फिल्म से स्टारडम के शिखर पर पहुँची कामिनी जी ने अपने करियर की दूसरी पारी में अभिनेता मनोज कुमार की माँ का किरदार निभाया और फिर सुर्ख़ियों में आ गईं। हालाँकि फिर वो मनोज कुमार के साथ कई फिल्मों में नज़र आईं जिनमें थीं – ‘शहीद‘, ‘उपकार ‘, ‘पूरब और पश्चिम ‘, ‘सन्यासी ‘, ‘शोर ‘,’रोटी कपड़ा और मकान ‘, ‘दस नम्बरी ‘और ‘संतोष’। कामिनी कौशल ने 1974 में ‘प्रेम नगर ‘ और 1976 में ‘महा चोर ‘में राजेश खन्ना की माँ और ‘दो रास्ते ‘में भाभी की यादगार भूमिका निभाई थी ,राजेश जी के साथ भी आपने तीन फिल्मों, ‘दो रास्ते’ (1969), ‘प्रेम नगर ‘(1974), ‘महा चोर’ (1976) में साथ काम किया। तो संजीव कुमार के साथ वो ‘अनहोनी’ (1973) में नज़र आईं। कामिनी जी की ऑन स्क्रीन जोड़ी की बात करें तो उनकी जोड़ी सबसे ज़्यादा दिलीप कुमार के संग पसंद की गई। 

1965 में, कामिनी कौशल ‘शहीद ‘ फिल्म के साथ चरित्र भूमिकाएं भी निभाने लग गईं। ‘वारिस’, ‘विश्वास ‘,’यकीन ‘, ‘आदमी और इंसान ‘, ‘गुमराह ‘, ‘उपहार ‘,’कैद ‘, ‘भँवर ‘, ‘ताँगेवाला और हीरालाल पन्नालाल ‘ में उनके अभिनय को ख़ास तौर पर सराहा गया।

नीचा नगर (1946) और बिराज बहू (1954) जैसी फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। ‘बिराज बहू ‘ के लिये आपने फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता था। 1946 से 1963 तक आपने मुख्य नायिका की भूमिका निभाई, जिसमें ख़ास तौर पर याद आ रही हैं जैसे -‘दोभाई‘ (1947), ‘शहीद ‘(1948), ‘ज़िद्दी ‘(1948), ‘शबनम ‘(1949), ‘नदिया के पार ‘(1948), ‘पारस ‘(1949), ‘नमूना ‘(1949), ‘आरजू ‘(1950), ‘झांझर‘ (1953), ‘आबरू ‘(1953), ‘नाइट क्लब ‘(1958), ‘जेलर ‘(1958), ‘ बड़े सरकार‘ और ‘गोदान‘ (1963) . गोदान को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है। वो क़रीब तीन दशक तक सबसे महंगी एक्‍ट्रेस रहीं।

शाहरुख और आमिर ख़ान जैसे सितारों के साथ भी किया काम:-

अपने शुरूआती दौर में जब लता मंगेशकर मुख्य भूमिका के लिए अपनी आवाज़ नहीं दे रहीं थीं तब पहली बार फिल्म ‘ज़िद्दी ‘में कामिनी जी के लिए लता जी ने गाना गाया था। नब्‍बे के दशक और उसके बाद वो बहुत ज़्यादा तो नहीं फिर भी कुछ एक्‍ट‍िव रहीं और ‘लागा चुनरी में दाग’, ‘चेन्‍नई एक्‍सप्रेस’, ‘कबीर सिंह’ और आख‍िरी बार आमिर खान की फिल्‍म ‘लाल सिंह चड्ढा’ में कैमियो रोल में अपनी मासूम ,चुलबुली अदाओं से हमारा दिल जीता तो फिल्म ‘कबीर सिंह’ में शाहिद की दादी का यादगार किरदार निभाया।

कामिनी कौशल को साल 2015 में फिल्‍मफेयर ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्‍मानित किया और साल 2020 में शाहिद कपूर की फिल्म ‘कबीर सिंह’ के लिए आपको बेस्‍ट सपोर्टिंग एक्‍ट्रेस का नॉमिनेशन भी मिला। आज उनके हुनर को याद करते हुए उन्हीं की कही बात याद आ रही है ,एक बार उन्होंने बताया था कि ‘जवानी में भी मेरे पास मौज मस्‍ती करने का वक़्त नहीं था , न मेरा कोई क्रश था। मैं तैराकी, घुड़सवारी, स्केटिंग और रेडियो नाटक करने में ही बिज़ी थी, जिसके लिए उस ज़माने में मुझे 10 रुपये मिलते थे।’ कामिनी कौशल
बॉक्स ऑफिस इंडिया की “शीर्ष अभिनेत्रियों” की सूची में दो बार, 1947 और 1948 में दिखाई दीं। 
2022 में, उन्हें आउटलुक इंडिया की “75 सर्वश्रेष्ठ बॉलीवुड अभिनेत्रियों” की सूची में रखा गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *