Jabalpur News: इस फर्जीवाड़े की शिकायत शैलेन्द्र बारी नामक व्यक्ति ने पुलिस में की। लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद, मामला कोर्ट पहुंचा, जहां न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट पलक श्रीवास्तव ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिए।
Jabalpur News in hindi:जबलपुर जिला अस्पताल में फर्जी डॉक्टर चिकित्सा अधिकारी के पद पर नियुक्त होकर लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रहा था। उसे वेतन भी मिल रहा। जब यह मामला कोर्ट पहुंचा तो गुरुवार को जबलपुर जिला कोर्ट ने सुनवाई के बाद पुलिस को झोलाछाप डॉक्टर शुभम अवस्थी के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए।
शुभम अवस्थी ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से BAMS (आयुर्वेद स्नातक) की फर्जी डिग्री तैयार करवाई और झूठा दावा किया कि उसने शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, जबलपुर से पढ़ाई की है। इसके बाद, उसने मध्यप्रदेश आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा बोर्ड, भोपाल में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पहले से मौजूद पंजीयन क्रमांक (56970) का इस्तेमाल करके खुद को डॉक्टर साबित कर दिया।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय को गुमराह कर आयुष चिकित्सक की नौकरी हासिल कर ली और सरकारी वेतन भी लिया। एक साल तक उसने मरीजों का इलाज किया जबकि वह असली डॉक्टर था ही नहीं।
कोर्ट ने दिए एफआईआर के आदेश
इस फर्जीवाड़े की शिकायत शैलेन्द्र बारी नामक व्यक्ति ने पुलिस में की। लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद, मामला कोर्ट पहुंचा, जहां न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट पलक श्रीवास्तव ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिए। आरोपी शुभम अवस्थी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में केस दर्ज करने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने दी दखल
इस मामले में पुलिस की लापरवाही को देखते हुए याचिकाकर्ता ने जबलपुर हाईकोर्ट में भी अपील की थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 60 दिनों के भीतर जिला अदालत इस मामले पर फैसला सुनाए। इसके बाद, कोर्ट ने पुलिस को 5 अप्रैल तक पूरी जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
याचिकाकर्ता के वकील परितोष गुप्ता ने बताया कि शुभम अवस्थी ने लगभग एक साल तक मरीजों की जान से खिलवाड़ किया। झोलाछाप डॉक्टर होने के बावजूद वह अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखता था। उसने अल्टरनेटिव सिस्टम ऑफ मेडिसिन में स्नातक और स्नातकोत्तर की फर्जी डिग्री तैयार करवाकर अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखा, जो कानूनी तौर पर गलत है। याचिकाकर्ता ने जब इस मामले की शिकायत कराई तो करीब 1.5 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हाई कोर्ट ने दिए निर्णय लेने के आदेश
शिकायतकर्ता शैलेन्द्र बारी ने बताया, वह अपने एक दोस्त का इलाज करवाने के लिए उसे जिला अस्पताल गए, जहां उन्हें पता चला कि शुभम अवस्थी नाम के डॉक्टर ने कोरोना काल के दौरान मरीजों का इलाज किया था और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक वर्ष तक नौकरी की थी। इस संबंध में उन्होंने जनवरी, 2023 में इसकी शिकायत सीएमएचओ, कलेक्टर और एसपी से की, लेकिन जब किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई, तो जिला कोर्ट जबलपुर में परिवाद दायर किया। यहां भी मामला लंबित रहा। फिर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई।
वकील परितोष गुप्ता ने हाई कोर्ट में बताया कि जबलपुर जिला न्यायालय में इसका आवेदन एक साल से लंबित है। पुलिस अधिकारी इस मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रहे हैं। इस पर हाई कोर्ट ने जिला कोर्ट को 60 दिन के भीतर निर्णय लेने के आदेश दिए।
डॉक्टर ने कहा- कोविड में लोग मर रहे थे, तब मैंने सेवाएं दी
आरोपी डॉ. शुभम अवस्थी का कहना है कि साल 2020-2021 के कोरोना काल के दौरान जब अपनों ने भी साथ छोड़ दिया था, तब मैंने 10 महीने तक जिला अस्पताल में सेवाएं दी थी। उस समय कोविड से लोग मर रहे थे तब मैंने अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए पूरी तरह अस्पताल में रहकर काम किया। यहां तक कि मैं घर भी नहीं जाता था। शुभम अवस्थी ने कहा कि मेरा काम केवल कोविड सैंपल लेना और उसे लैब भिजवाना था, न कि मरीजों का इलाज करना। उन्होंने यह भी कहा कि अभी कोर्ट ने पुलिस को जांच के निर्देश दिए हैं, इसलिए मुझे फर्जी डॉक्टर कहना उचित नहीं है। पुलिस अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी और जो भी निर्णय आएगा, वह मुझे स्वीकार होगा।