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रीवा कलेक्टर से दीवाली का उपहार पाकर खिले बच्चों के चेहरे, कलेक्टर ने बढ़ाया हौसला

Rewa Collector

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Faces of children blossomed after receiving Diwali gift from Rewa Collector: रीवा। कोविड-19 महामारी के प्रकोप में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के चेहरों पर दीपावली के अवसर पर मुस्कान लौटी। रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने गुरुवार, 16 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट के बाणसागर सभागार में प्रधानमंत्री केयर और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत लाभान्वित 5 पीड़ित बच्चों से भेंट की और उन्हें दीपावली के उपहार भेंट किए। कलेक्टर के आशीर्वाद और उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

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कलेक्टर पाल ने बच्चों से संवाद करते हुए उनकी बहादुरी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “आप सबने बड़ी बहादुरी से जीवन के कठिन समय का सामना किया है। कठिनाईयों का बहादुरी से सामना करने वाले सदैव सफल होते हैं।” कलेक्टर ने बच्चों को पूरी मेहनत से शिक्षा पूरी करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने बच्चों को आर्थिक आत्मनिर्भरता का मंत्र देते हुए कहा कि पीएम केयर फंड से मिलने वाली राशि का उपयोग स्टार्टअप और स्वरोजगार की गतिविधियों के लिए करें और हर माह मिलने वाली सहायता राशि का सदुपयोग करें। उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, “बहादुर व्यक्तियों की मदद भगवान भी करते हैं। आप सब का भविष्य उज्ज्वल रहे और आप पूरे उल्लास के साथ दीपावली मनाएं। शिक्षा और कॅरियर में किसी भी तरह की सहायता या मार्गदर्शन के लिए आप कभी भी हम सबके पास आ सकते हैं।” कलेक्टर ने प्रत्येक बच्चे से उनकी शिक्षा व्यवस्था और परिवार के संबंध में विस्तृत जानकारी ली।

जिले में 282 बच्चों को मिल रही है सहायता

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास नयन सिंह ने बताया कि रीवा जिले में कोविड से बेसहारा हुए 282 बच्चों को प्रधानमंत्री केयर तथा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से हर माह सहायता राशि दी जा रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से अनुज शुक्ला, प्रियांशी शुक्ला तथा वैष्णवी मालवीय को, जबकि पीएम केयर फॉर चिल्ड्रेन स्कीम से अक्षय द्विवेदी तथा रिया मिश्रा को सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इन्हें 18 वर्ष की आयु होने तक पाँच हजार रुपए हर माह मिलेंगे। सितंबर माह तक जिले के सभी 282 बच्चों को सहायता राशि का भुगतान किया जा चुका है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी इन बच्चों और उनके अभिभावकों से लगातार संपर्क बनाए रखते हैं।

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