भारत सरकार Employees Provident Fund Organisation (EPFO) की सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में अपना एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। EPFO जल्द ही यूपीआई आधारित पीएफ विड्रोल जैसी सुविधा शुरू करने वाला है जिससे इसके मेंबर सीधे अपने बैंक खाते में फंड ट्रांसफर कर पाएंगे। ये बदलाव EPFO 3.0 पहला का एक हिस्सा है और इसका असर करोड़ों नौकरी पेशा कर्मचारियों पर देखने को मिलेगा।
EPFO UPI Withdrawal सिस्टम क्या होता है?
नए सिस्टम के अनुसार इसमें इसके सदस्य को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई के माध्यम से अपने पीएफ खाते से डायरेक्ट पैसे निकालने में मदद मिलेगी। वर्तमान में पीएफ विड्रो के प्रोसेस में claim approval, Bank verification और settlement मैं कई दिन लग जाते हैं नए डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य इन सभी प्रक्रिया को तेज बनाना और आसान बनाना है।
भारत के केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडवीया ने हाल ही में बताया कि EPFO मैं नई टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग लगभग पूरी कर ली है। अब इसी वह प्रक्रिया तरीके से लागू करने वाला है।
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क्यों जरूरी माना जा रहा है बदलाव?
EPFO के पास पूरे देश में करोड़ों कर्मचारियों की रिटायरमेंट की सेविंग्स जमा है। हालांकि लंबे समय से उपयोगकर्ता अपने पैसे पाने के लिए कोशिश करते रहे हैं, लेकिन उन्हें claim rejection, KYC mismatch और delayed settlement जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार भारत में यूपीआई के ट्रांजैक्शन का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है। ऐसे में EPFO यूपीआई देश के डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम को और भी ज्यादा मजबूत कर सकती है।
ऐसा होने से बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मैन्युअल प्रोसेसिंग कम होगी ट्रांजैक्शन में भी पारदर्शिता आएगी और छोटे-छोटे withdrawn जल्दी से सेटल हो पाएंगे।
किन चुनौतियों पर होने वाली है नजर
हालांकि सरकार ने टेस्टिंग पूरी होने की बात बताई है लेकिन नेशनवाइड रॉलआउट की ऑफिशियल तारीख अभी भी घोषित नहीं हुई है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट है कि सदस्य पूरा पीएफ बैलेंस तुरंत निकाल पाएंगे या केवल आंशिक रूप सेअनुमति होगी।EPFOl के लिए सबसे बड़ी चुनौती इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्रॉड प्रिवेंशन सिस्टम को मजबूत बनाए रखना होने वाला है। बड़ी संख्या में ट्रांजैक्शन को संभालने के लिए मजबूत डिजिटल मॉनिटरिंग की जरूरत होने वाली है।
निवेशकों और कर्मचारियों पर क्या असर ?
यह बदलाव सीधे शेयर बाजार से जुड़ा हुआ नहीं है लेकिन फिंच और डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए एक पॉजिटिव संकेत बताया जारहा है। यूपीआई इकोसिस्टम से जुड़ी कंपनियों को लंबे समय में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ाने का लाभ मिलने वाला है कर्मचारियों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा लिक्विडिटी एक्सेस होने वाला है। आपात की स्थिति में पीएफ निकासी पहले की तुलना में अधिक तेज होने वालीहै। हालांकि विशेषज्ञ ऐसा सलाह देते हैं कि रिटायरमेंट कॉरपस को केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही निकालना चाहिए।
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आगे क्या होगा?
EPFO आने वाले महीनों में WhatsApp integration, simplified digital claims और mobile-based services आदि भी शुरू करने की तैयारी में है कंपनी के ऑफिशियल बयान के अनुसार इसका उद्देश्य पूरी पीएफ प्रणाली को पेपरलेस और फास्टर सेटलमेंट आधार पर बनानाथा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अगर यूपीआई प्रणाली सफल हो जाती है तो यह भारत के सोशल सिक्योरिटी मेक महत्वपूर्ण डिजिटल सुधार होगा।

