Effigy burning in Singrauli against India-US trade deal and Adani project: मध्य प्रदेश के रीवा संभाग में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। किसान संगठनों ने इस डील को भारतीय कृषि के लिए “पूर्ण आत्मसमर्पण” और अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में बताया है। वे दावा कर रहे हैं कि समझौते से सब्सिडी युक्त अमेरिकी कृषि उत्पादों की बाढ़ आ जाएगी, जिससे देश के किसानों की आजीविका पर विनाशकारी असर पड़ेगा। एसकेएम ने 12 फरवरी को देशव्यापी विरोध और हड़ताल का ऐलान किया है, जिसकी तैयारी विंध्य क्षेत्र में जोरों पर है।
सिंगरौली जिले में आदिवासी किसानों ने मोदी सरकार के संरक्षण में अदानी ग्रुप द्वारा बासी बेरदाह धिरौली कोल ब्लॉक इलाके में लाखों पेड़ों की कटाई पर जबरदस्त रोष जताया। किसान संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष अखिलेश शाह, महिला मोर्चा की सोनमती खैरवार, जिला महामंत्री राजपाल सिंह, सोमारू सिंह मरकाम, बैढ़न ब्लॉक अध्यक्ष काशी सिंह मरकाम, ग्राम अध्यक्ष अर्जुन सिंह मरकाम सहित बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं और किसानों ने मोदी-अडानी का पुतला दहन किया।
यह विरोध पर्यावरण विनाश, वन भूमि हड़पने और आदिवासी विस्थापन के खिलाफ है, जहां लगभग 6 लाख पेड़ कटने की रिपोर्ट्स हैं। रीवा जिले के ग्राम पंचायत खड्डा में भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष घनश्याम सिंह की अगुवाई में मोदी-ट्रंप के पुतले दहन किए गए। युवा नेता दिनेश सिंह, अतुल सिंह, मिथिलेश सिंह, प्रदीप सिंह, भूपेंद्र सिंह, रंगनाथ सिंह, ईश्वरदीन सिंह, संतोष सिंह, श्यामप्रताप सिंह, विवेक सिंह, अनिल सिंह, रजनीश कुशवाहा, शेरबहादुर सिंह समेत दर्जनों ग्रामीण शामिल रहे।
सीधी जिले में किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनोज कोल और नेता शिव सिंह की अगुवाई में भी मोदी-ट्रंप पुतले दहन कर व्यापार नीति का विरोध किया गया। मोर्चे के नेता शिव सिंह ने कहा कि पूरे विंध्य इलाके में किसान, मजदूर और आदिवासी मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। विरोध प्रदर्शन में नारेबाजी और जमकर आरोप लगाए गए कि सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है।यह विरोध राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा है, जहां एसकेएम ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। क्षेत्रीय किसान नेता इसे कृषि संकट और पर्यावरणीय आपदा से जोड़कर देख रहे हैं।

