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Education and Social Justice Program Rewa TRS : विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर विशेष कार्यक्रम

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Education and Social Justice Program Rewa TRS

Education and Social Justice Program Rewa TRS : विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर विशेष कार्यक्रम-विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर समाज में समानता, गरिमा और सहभागिता के मूल्यों को सशक्त करने हेतु टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा के समाजशास्त्र विभाग द्वारा एक विशेष संवाद एवं इंटरएक्टिव सेशन का आयोजन किया गया। “सामाजिक परिवर्तन के साधन के रूप में सामाजिक न्याय” विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करना, संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें सकारात्मक सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बना दिया। टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा में विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर आयोजित संवाद एवं इंटरएक्टिव सेशन में विशेषज्ञों ने सामाजिक न्याय, समान अवसर, लैंगिक समानता और सामाजिक परिवर्तन पर प्रेरक विचार साझा किए।

टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा में विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन

रीवा, 20 फरवरी 2026। समाजशास्त्र विभाग, टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा द्वारा विश्व सामाजिक न्याय दिवस के उपलक्ष्य में संवाद एवं इंटरएक्टिव सेशन का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संयोजन एवं उद्देश्य वाचन प्रो. अखिलेश शुक्ल, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र द्वारा किया गया।
अपने उद्बोधन में प्रो. अखिलेश शुक्ल ने सामाजिक न्याय की अवधारणा को समकालीन परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय केवल अधिकारों की प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समान अवसर, गरिमा और सहभागिता सुनिश्चित करने की एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता का प्रेरणादायक व्याख्यान

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. रचना श्रीवास्तव, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रहीं। उन्होंने अपने विस्तृत व्याख्यान में सामाजिक न्याय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, भारतीय संविधान में निहित प्रावधानों तथा वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा, समान अवसर, लैंगिक न्याय, आर्थिक समावेशन और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता ही सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख साधन हैं। साथ ही उन्होंने युवाओं को सामाजिक असमानताओं को समझकर तर्कसंगत सोच एवं संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।

विशिष्ट अतिथियों के विचार

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. विनोद रस्तोगी, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र, शासकीय पीजी महाविद्यालय ने सामाजिक न्याय को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के लाभ नहीं पहुँचते, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा है। डॉ. महानन्द द्विवेदी ने सामाजिक संरचना में व्याप्त असमानताओं और उनके समाधान में शिक्षा की भूमिका पर बल दिया। इसके साथ ही कार्यक्रम में डॉ. अजीत कुमार सिंह (अध्यक्ष, समाजशास्त्र, शासकीय विवेकानंद पीजी महाविद्यालय, मैहर), डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी, डॉ. फरजाना बानो, डॉ. प्रियंका पांडे, डॉ. निशा सिंह एवं योगेश निगम की गरिमामयी उपस्थिति एवं सक्रिय सहभागिता रही।

संवाद सत्र में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी

छात्रों के साथ आयोजित इंटरएक्टिव सेशन में सामाजिक न्याय से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई। विद्यार्थियों ने लैंगिक समानता, सामाजिक समावेशन, युवाओं की भूमिका और समान अवसर जैसे मुद्दों पर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा सरल, स्पष्ट एवं संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किया गया। यह सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं संवादात्मक रहा।

कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. निशा सिंह द्वारा किया गया। अंत में डॉ. शाहेदा सिद्दीकी ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह जानकारी डॉ. अखिलेश शुक्ल, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा द्वारा प्रदान की गई।

निष्कर्ष-टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा में आयोजित यह संवाद एवं इंटरएक्टिव सेशन विद्यार्थियों में सामाजिक न्याय के प्रति जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सकारात्मक सोच को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। इस तरह के कार्यक्रम न केवल युवाओं को सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाते हैं, बल्कि उन्हें समाज में रचनात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित भी करते हैं।

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