Site iconSite icon SHABD SANCHI

रीवा में जनसमस्याओं की गूंज: कहीं भ्रष्टाचार पर भड़के किसान, तो कहीं सड़क के लिए महिलाओं ने खोला मोर्चा

Echo of public problems in RewaEcho of public problems in Rewa

Echo of public problems in Rewa

रीवा। जिले में प्रशासनिक सुस्ती और भ्रष्टाचार के खिलाफ आम जनता का आक्रोश सड़कों से लेकर आला अधिकारियों के दफ्तरों तक पहुँचने लगा है। शुक्रवार को दो अलग-अलग मामलों में ग्रामीणों और शहरवासियों ने कलेक्टर एवं कमिश्नर को अपनी पीड़ा सुनाई। जहाँ त्योंथर और सिरमौर क्षेत्र के किसान खरीदी केंद्रों पर मचे अंधेरगर्दी से परेशान हैं, वहीं शहर के माधव नगर की महिलाएं बुनियादी सड़क सुविधा के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

मझियार खरीदी केंद्र में ‘कमीशन’ का खेल, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

सिरमौर तहसील के मझियार गेहूं खरीदी केंद्र से भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। ग्राम बगडा दुबे निवासी किसान प्रहलाद दुबे ने अन्य किसानों के साथ कलेक्टर को शिकायती पत्र सौंपकर केंद्र प्रबंधक पर अवैध वसूली के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। किसानों का दावा है कि स्लॉट बुकिंग के बावजूद प्रबंधक प्रति ट्रॉली 2 हजार रुपये की रिश्वत और प्रति क्विंटल 1 किलो 600 ग्राम अतिरिक्त अनाज की मांग कर रहा है। हद तो तब हो गई जब किसानों पर खुद ही लेबर लाने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर गेहूं न खरीदने की धमकी दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल एसडीएम को उच्च स्तरीय जांच और दोषी प्रबंधक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

माधव नगर में नारकीय जीवन: सड़क के गड्ढों ने छीना महिलाओं और बच्चों का सुकून

दूसरी ओर, रीवा शहर के वार्ड क्रमांक 27, माधव नगर (डी-मार्ट के पीछे) की स्थिति बद से बदतर हो गई है। यहाँ की निवासी कुमारी श्रेया सिंह के नेतृत्व में महिलाओं के एक दल ने कमिश्नर कार्यालय पहुँचकर अपनी व्यथा सुनाई। रहवासियों का कहना है कि सड़क इस कदर जर्जर हो चुकी है कि यहाँ से एम्बुलेंस या बच्चों की स्कूल वैन निकलना नामुमकिन है। सबसे बुरा हाल गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों का है, जिन्हें अस्पताल ले जाने में हर पल हादसे का डर बना रहता है। बुनियादी सुविधाओं जैसे राशन और सब्जी लाने तक के लिए संघर्ष कर रहीं इन महिलाओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगी।

इन दोनों ही मामलों ने रीवा के प्रशासनिक तंत्र और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों पर कितनी तत्परता से अमल करता है।

Exit mobile version