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E20 फ्यूल ने बिगाड़ा गाड़ियों का खेल? आधे से ज्यादा वाहन मालिक बोले- माइलेज गिरा, इंजन में बढ़ी दिक्कतें

E20 Petrol Mileage Problem: अगर आपके पास 2022 या उससे पहले खरीदी हुई पेट्रोल कार या बाइक है, तो E20 पेट्रोल (E20 Petrol) ने शायद आपकी जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है। देशभर से बड़ी संख्या में वाहन मालिक शिकायत कर रहे हैं कि E20 फ्यूल आने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज (Mileage) कम हो गया है और इंजन से जुड़ी समस्याएं बढ़ गई हैं।

अब इस बीच सरकार एक नया कदम उठाने की तैयारी में है, जिससे वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिल सकती है। खबर है कि पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blend) वाले पेट्रोल के लिए अलग नोजल लगाने की योजना बनाई जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, भारत सरकार ने 2025 से E20 पेट्रोल को बड़े स्तर पर लागू करना शुरू किया है। E20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 फीसदी इथेनॉल (Ethanol) मिलाया गया हो। सरकार का दावा है कि इससे तेल आयात कम होगा और प्रदूषण भी घटेगा।

लेकिन अब जमीन पर इसकी अलग तस्वीर दिखाई दे रही है।

लोकल सर्कल्स (LocalCircles) के एक सर्वे के मुताबिक, 2022 या उससे पहले खरीदी गई पेट्रोल गाड़ियों के करीब 50 फीसदी मालिकों ने माना कि E20 फ्यूल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो गया है।

यह सर्वे देश के 301 जिलों में किया गया, जिसमें 50 हजार से ज्यादा वाहन मालिक शामिल थे। इनमें महानगर, टियर-2 और छोटे शहरों के वाहन उपयोगकर्ता भी शामिल थे।

माइलेज ही नहीं, टूट-फूट भी बढ़ी

सर्वे में शामिल 29 फीसदी लोगों ने बताया कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ियों में टूट-फूट (Wear and Tear) बढ़ गई है।

वाहन मालिकों ने जिन समस्याओं की शिकायत की, उनमें शामिल हैं-

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में पिछले 15 सालों में बिके ज्यादातर वाहन E5 या E10 फ्यूल के हिसाब से डिजाइन किए गए थे। ऐसे में E20 जैसे हाई इथेनॉल ब्लेंड (High Ethanol Blend) से पुराने इंजन और रबर-प्लास्टिक के पार्ट्स पर असर पड़ सकता है।

सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में फर्क?

सरकार का दावा है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में सिर्फ 1 से 6 फीसदी तक गिरावट आती है। लेकिन सर्वे में शामिल कई वाहन मालिकों ने इससे कहीं ज्यादा नुकसान की बात कही है।

असल में इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम होती है। साथ ही यह नमी जल्दी सोखता है, जिससे पुराने इंजन और फ्यूल सिस्टम (Fuel System) पर असर पड़ सकता है।

यानी जो गाड़ियां E20 के लिए डिजाइन नहीं हुई थीं, उनमें लंबे समय बाद बड़ी तकनीकी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं।

2023 के बाद वाली गाड़ियों का क्या?

2023 के बाद लॉन्च हुई कई नई गाड़ियों को कंपनियों ने E20 कम्पैटिबल (E20 Compatible) बताकर बाजार में उतारा था। यानी उनके इंजन और फ्यूल सिस्टम को E20 के हिसाब से डिजाइन किया गया है।

हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले वर्षों में असली तस्वीर साफ होगी कि नई गाड़ियां लंबे समय तक E20 को कितना बेहतर तरीके से संभाल पाती हैं।

अब सरकार क्या करने जा रही है?

इसी बीच इकोनॉमिक टाइम्स (Economic Times) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण वाले फ्यूल के लिए अलग नोजल लगाने पर विचार कर रही है।

यानी भविष्य में ग्राहकों को E20, E22, E25, E27 और E30 जैसे अलग-अलग फ्यूल ऑप्शन मिल सकते हैं और वे अपनी गाड़ी के हिसाब से पेट्रोल चुन सकेंगे।

अगर ऐसा होता है तो पुराने वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि वे अपनी गाड़ी के लिए कम इथेनॉल वाला पेट्रोल चुन पाएंगे।

क्यों बढ़ा रही सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग?

भारत सरकार लंबे समय से इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका मकसद-

हालांकि अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश में करोड़ों पुराने वाहनों को अचानक E20 के लिए तैयार मान लेना जल्दबाजी थी?

फिलहाल सरकार की नई योजना वाहन मालिकों को कुछ राहत जरूर दे सकती है। लेकिन आने वाले समय में E20 और उससे ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल का असर भारतीय सड़कों पर साफ दिखाई देगा।

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