E-Tricycle Battery Blast in Betul: बैतूल जिले के सारनी में शुक्रवार रात ई-ट्राइसाइकिल की बैटरी अचानक फट गई, जिससे भीषण आग लग गई। इस हादसे में उस पर सवार दिव्यांग शिक्षक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान सुनील कुमार लोखंडे (उर्फ गुड्डू) के रूप में हुई है। वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा चलाते थे।
E-Tricycle Battery Blast in Betul: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के कोयला नगरी सारनी में शुक्रवार शाम करीब 8 बजे एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। जय स्तंभ चौक (जस्तम चौक) के पास एक ई-ट्राइसाइकिल की बैटरी में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया, जिससे वाहन में भीषण आग लग गई। इस हादसे में वाहन पर सवार दिव्यांग शिक्षक सुनील कुमार लोखंडे (उर्फ गुड्डू) मौके पर ही जिंदा जलकर मृत्यु हो गई।
ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा चलाता था मृतक
मृतक सुनील कुमार लोखंडे पुत्र बलीराम लोखंडे सारनी के निवासी थे। वह दिव्यांग थे और स्थानीय बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा चलाते थे। परिवार और स्थानीय लोग उन्हें एक मेहनती और पढ़ाने के प्रति समर्पित व्यक्ति के रूप में जानते थे।
विस्फोट के साथ ही उठने लगीं आग की लपटें
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 8 बजे सुनील अपनी ई-ट्राइसाइकिल पर सवार होकर जा रहे थे, तभी जय स्तंभ चौक के निकट बैटरी में अचानक विस्फोट हो गया। विस्फोट के साथ ही आग की लपटें उठने लगीं और पूरा वाहन आग की चपेट में आ गया। सुनील बुरी तरह झुलस गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पास की दुकान चलाने वाले बिल्लू जगदेव ने तुरंत पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि उसे नियंत्रित नहीं किया जा सका। आग ने ट्राइसाइकिल को भी पूरी तरह जला दिया।
पुलिस मामले की जांच कर रही
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। बाद में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और बैटरी विस्फोट के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
योजना के तहत मिली ट्राइसाइकिल, गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों और परिजनों के अनुसार, यह ई-ट्राइसाइकिल लगभग ढाई साल पहले नगर पालिका द्वारा दिव्यांगजन सहायता योजना के तहत प्रदान की गई थी। कभी कोई तकनीकी खराबी नहीं दिखी थी, लेकिन अब बैटरी की गुणवत्ता, रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत वितरित होने वाले ऐसे वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों की जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं न हों।

