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DRDO का 30 kW लेजर हथियार तैयार, 5 KM तक ड्रोन और ड्रोन समूह को निशाना बनाने की क्षमता

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नई दिल्ली। ड्रोन हमलों से निपटने के लिए भारत अपनी लेजर आधारित हथियार प्रणाली को लगातार मजबूत कर रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 30 किलोवाट क्षमता वाली लेजर निर्देशित ऊर्जा हथियार प्रणाली Mk-II(A) विकसित की है। इसे करीब 5 किलोमीटर तक के हवाई खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।

इस प्रणाली का अप्रैल 2025 में आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित राष्ट्रीय खुले परीक्षण क्षेत्र में प्रदर्शन किया गया था। परीक्षण के दौरान सिस्टम ने एक छोटे फिक्स्ड-विंग ड्रोन को निशाना बनाया। इसके अलावा एक साथ कई ड्रोन के हमले यानी ड्रोन समूह को रोकने और निगरानी सेंसर व एंटीना को निष्क्रिय करने की क्षमता भी दिखाई गई। इस परीक्षण में करीब 3.5 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य साधे गए थे।

रडार से पहचान, फिर लेजर से निशाना

यह एक निर्देशित ऊर्जा हथियार प्रणाली है। इसमें रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर की मदद से हवाई लक्ष्य की पहचान और उसकी निगरानी की जाती है। इसके बाद शक्तिशाली लेजर किरण को लक्ष्य पर केंद्रित किया जाता है।

लेजर कुछ ही समय में लक्ष्य तक पहुंचती है और पर्याप्त ऊर्जा मिलने पर ड्रोन के ढांचे या उसके जरूरी सेंसर को नुकसान पहुंचाकर उसे निष्क्रिय कर सकती है। कुरनूल के परीक्षण में भी ड्रोन और निगरानी उपकरणों पर इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।

2 kW और 10 kW क्षमता वाली प्रणालियों पर भी काम

DRDO ने कम क्षमता वाली लेजर प्रणालियां भी विकसित की हैं। 2 किलोवाट क्षमता वाली प्रणाली को छोटे ड्रोन से निपटने के लिए विकसित किया गया है। इसके बाद ज्यादा क्षमता वाली प्रणालियों पर काम आगे बढ़ाया गया।

DRDO की 30 kW प्रणाली को लेकर 5 किलोमीटर तक की क्षमता का उल्लेख किया गया है, जबकि अप्रैल 2025 में इसका प्रत्यक्ष परीक्षण करीब 3.5 किलोमीटर की दूरी पर किया गया था। इसलिए 5 किलोमीटर को विकसित क्षमता और 3.5 किलोमीटर को परीक्षण में प्रदर्शित दूरी के तौर पर समझना सही होगा।

50 kW और 100 kW क्षमता पर भी काम

DRDO भविष्य में इससे ज्यादा शक्तिशाली लेजर हथियार विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों में 50 kW से 100 kW वर्ग की प्रणालियों के विकास का उल्लेख है। इनका उद्देश्य भविष्य में बड़े और अलग-अलग तरह के हवाई खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाना है।

सेना के लिए क्यों अहम है लेजर हथियार?

लेजर हथियारों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लक्ष्य पर हमला करने के लिए हर बार मिसाइल या पारंपरिक गोला-बारूद की जरूरत नहीं होती। इसके लिए मुख्य रूप से बिजली और जरूरी सहायक व्यवस्था की आवश्यकता होती है।

ड्रोन जैसे अपेक्षाकृत कम लागत वाले लक्ष्यों के खिलाफ महंगी मिसाइलों का बार-बार इस्तेमाल करना चुनौती हो सकता है। ऐसे में लेजर आधारित हथियार वायु रक्षा व्यवस्था में एक अतिरिक्त विकल्प दे सकते हैं।

बहुस्तरीय वायु रक्षा में भी शामिल

अगस्त 2025 में DRDO ने एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली यानी IADWS का पहला परीक्षण किया था। इस बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली में त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा मिसाइलें और उच्च शक्ति वाला लेजर आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार शामिल था।

भारत के अलावा दूसरे देश भी कर रहे काम

भारत के अलावा अमेरिका, चीन, रूस और इजराइल समेत कई देश निर्देशित ऊर्जा हथियारों पर काम कर रहे हैं। अमेरिका, रूस और चीन ने इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है, जबकि इजराइल भी उच्च शक्ति वाले लेजर आधारित वायु रक्षा सिस्टम विकसित कर रहा है।

भारत का 30 kW Mk-II(A) भी इसी दिशा में विकसित की जा रही तकनीक का हिस्सा है। इसका मुख्य इस्तेमाल ड्रोन, ड्रोन समूह और कुछ अन्य हवाई खतरों से निपटने के लिए किया जा सकता है।

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