Donald Trump Peace Board : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के आक्रामक रुख से नाराज होकर उन्हें अपने शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण वापस ले लिया है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप की नेतृत्व वाले शांति बोर्ड संगठन को उनके कई पश्चिमी सहयोगी देश संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। क्योंकि इस शांति बोर्ड का गठन शुरुआत में इजराइल और हमास के बीच युद्ध पर विराम लगाने के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन आलोचकों का मानना है कि इस बोर्ड की स्थापना के पीछे डोनाल्ड ट्रंप की मंशा कुछ और ही है।
कनाडा अमेरिका से मुकाबला करने के तरीके खोज रहा
बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पहले से ही डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। मार्क कार्नी उन नेताओं में तेजी से उभर रहे हैं जो अमेरिका का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने के तरीके खोज रहे हैं। दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान मार्क कार्नी ने कहा भी था, ‘‘मध्यम शक्ति वाले देशों को मिलकर कदम उठाना होगा, क्योंकि यदि आप बातचीत की मेज पर नहीं हैं, तो आप दांव पर हैं।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता के इस दौर में, मध्यम शक्ति वाले देशों के पास विकल्प है- या तो वे कृपा पाने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करें या फिर एक प्रभावशाली तीसरा मार्ग बनाने के लिए एकजुट हों।’’
मार्क कार्नी ने आगे कहा, ‘‘हमें इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि वैधता, ईमानदारी और नियमों की शक्ति मजबूत बनी रहेगी, यदि हम इसे मिलकर इस्तेमाल करने का फैसला करें।’’
ट्रंप ने कनाडा को दिया शांति बोर्ड का निमंत्रण वापस लिया
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस में दिए गए बयान के बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए कनाडा को दिए गए निमंत्रण को वापस ले लिया। ट्रंप ने कहा कि कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने दावोस में धमकीभरे लहजे में रिएक्शन दिया। इसलिए कनाडा को दिया गया ‘‘शांति बोर्ड’’ का निमंत्रण वापस ले लिया।
अमेरिका के सहयोगी देश अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दूरी बनाने लगे हैं, क्योंकि ट्रंप एक ऐसी व्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं जो बहुत कम स्थिर साबित हो सकती है। यह व्यवस्था पूरी तरह से एक अकेले, अक्सर मनमौजी नेता की इच्छाओं और स्वार्थ के आधार पर संचालित हो रही है, जहां व्यक्तिगत चापलूसी और द्वेष फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
दावोस से अमेरिका लौटते हुए अलास्का की रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुरकोव्स्की ने कहा कि उन्होंने “बार-बार” सुना है कि “हम इस नई विश्व व्यवस्था में प्रवेश कर रहे हैं”, और उन्होंने सहयोगी देशों में इस बदलाव को लेकर भ्रम और असमंजस की भावना का भी उल्लेख किया। उन्होंने रिपोर्टरों से कहा, “यह हो सकता है कि आपने राष्ट्रपति के साथ एक खराब फोन कॉल किया हो, और परिणामस्वरूप आपके खिलाफ टैरिफ लगाए गए हों।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि यह अस्थिरता और विश्वसनीयता की कमी का संकेत है।”
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