अब तलाकशुदा बेटियां भी पेंशन की होंगी पात्र, पेंशन नियम में सरकार कर रही बदलाव

भोपाल। एमपी के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के पेंशन नियमों में संशोधन करने का निर्णय लिया है। जिसके के तहत अब तलाकशुदा बेटियां भी परिवार पेंशन की पात्र होंगी। सरकार के इस कदम को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है। अनुमोदन अनुसार नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है।

प्रक्रिया को बनाया गया सरल

प्रस्तावित नियमों में प्रक्रियाओं एवं अधिकारिताओं को सहज बनाया गया है, जिससे पेंशनर्स को सुविधा होगी। संबंधित प्रकरणों का निराकरण समयसीमा में हो सकेगा। सेवानिवृत्तों को सारांशीकरण कराया जाने में सुविधा होगी तथा पेंशन सारांशीकरण मूल्य की गणना में सुविधा होगी। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026 के नियम-44 के अंतर्गत परिवार पेंशन के लिए पात्र सदस्यों में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी सम्मिलित किया गया है।

1 अप्रैल से होगी लागू

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान का संदाय) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है। अनुमोदन अनुसार यह नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील होंगे। नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है।

इस तरह की पेंशन व्यवस्था

प्रमुख नवीन प्रावधान अंतर्गत अभिदाता की मृत्यु की दशा में परिवार पेंशन का प्रावधान किया गया है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और ई-सेवा पुस्तिका संबंधी प्रावधान किया गया है। केन्द्र तथा मध्यप्रदेश शासन की पूर्व सेवाओं को जोड़ा जायेगा। निलम्बन अवधि में अभिदाता तथा नियोक्‍ता के अंशदान का प्रावधान किया। इसके साथ ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत एवं स्पष्ट प्रक्रिया, अंशदान की दर, गणना एवं विलंब की स्थिति में उत्तरदायित्व निर्धारण के साथ सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र एवं मृत्यु की दशा में निकास प्रावधान किया गया है।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत आने वाले शासकीय सेवकों के लिए उपदान की पात्रता निर्धारण एवं भुगतान की सुस्पष्ट प्रक्रिया होगी। विभागीय जांच (सेवा निवृत्ति उपरांत) आदेश के संदर्भ में उपदान से वसूली संभव होगी। विभागीय जांच की अवधि में नियोक्‍ता के अंशदान का भुगतान रोका जाना, सेवानिवृत्ति के तीन माह पूर्व अभिदाता अंशदान रोका जाना और सेवानिवृत्ति उपरांत विभागीय जांच संस्थित किये जाने का प्रावधान के साथ नियमों के निवर्तन और शिथिलीकरण के संबंध में राज्य शासन की शक्ति के प्रावधान शामिल है।

कैबिनेट ने लिया ऐसा निणर्य

-जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को वर्ष 2030-31 तक की निरंतरता के लिए 7,133 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति
-धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत अविद्युतीकृत घरों एवं शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण के लिए 366 करोड़ 72 लाख रूपये की स्वीकृति
-उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आईटी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को एक बार के लिए आयु सीमा में पाँच वर्ष की छूट की स्वीकृति
-म.प्र. सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का सारांशीकरण) नियम 2026 का अनुमोदन
मध्यप्रदेश सिविल सेवा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन नियम 2026 तथा उपदान का संदाय नियम 2026 का अनुमोदन

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