रीवा जिले में यूरिया संकट, जिला पंचायत सदस्य ने अधिकारियों पर लगाए कालाबाजारी और साठगांठ के आरोप

urea crisis in Rewa

District Panchayat member made serious allegations against officials on urea crisis in Rewa: रीवा जिले के किसानों को यूरिया खाद की लगातार कमी और कालाबाजारी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में वार्ड 18 की सदस्य नंदिनी हर्षवर्धन तिवारी ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यूरिया और अन्य खादों के साथ किसानों को जबरन अन्य सामग्री थोपी जा रही है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ रही है।

सदस्य नंदिनी तिवारी ने बैठक में बताया कि करहिया डबल लॉक से अधिकारियों की मिलीभगत से प्राइवेट दुकानदारों को अवैध रूप से यूरिया वितरित की जा रही है। इस वजह से जिले की अधिकतर समितियों में यूरिया का स्टॉक खत्म हो गया है। किसानों को गेहूं की फसल में पहला पानी देने के समय यूरिया नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनियों की मनमानी टैगिंग और बड़े व्यापारियों व अधिकारियों की साठगांठ से यूरिया बाजार में 600 से 700 रुपये तक बिक रही है। किसान मजबूरन नैनो यूरिया, नैनो डीएपी जैसी अतिरिक्त सामग्री खरीदने को बाध्य हो रहे हैं, जिनका उन्हें कोई उपयोग नहीं है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डबल लॉक सेंटर से बड़े व्यापारियों को अनियमित तरीके से यूरिया और डीएपी दी जा रही है। छोटे व्यापारी भी मजबूरन टैगिंग के साथ यूरिया बेच रहे हैं, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। नंदिनी तिवारी ने कहा कि उनके पास इसकी सबूत हैं, लेकिन बड़े अधिकारियों का नाम शामिल होने के कारण वे सदन में नाम नहीं लेंगी। उन्होंने पिछले बैठक में भी टैगिंग के अधिकार पर सवाल उठाया था, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

जिला पंचायत सदस्य ने चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह की अनियमितताएं सरकार की किसानों की आय दोगुनी करने की मंशा पर पानी फेर रही हैं। उन्होंने सदन के अन्य सदस्यों से सहमति मांगी और अधिकारियों से इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। बैठक में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना रहा, और किसानों की समस्या पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की गई। जिले में यूरिया की कमी से किसानों की फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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