Site iconSite icon SHABD SANCHI

MP: डिंडोरी जिला अस्पताल में लापरवाही का आरोप, जहर खाने वाले नाबालिग को चढ़ाई मिनरल वाटर की ड्रिप

Dindori District Hospital News: डिंडोरी जिला अस्पताल में जहर खाने वाले एक नाबालिग मरीज को मिनरल वाटर की बोतल से ड्रिप चढ़ाने का वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। मामले में CMHO डॉ. मनोज पांडे ने उपचार प्रक्रिया में चूक की बात स्वीकार करते हुए कहा कि मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसा नहीं होना चाहिए था। वहीं, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

Dindori District Hospital News: मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडोरी जिले के सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड (Emergency Ward) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें जहरीली दवा खाने वाले एक नाबालिग मरीज के पेट में गैस्ट्रिक ट्यूब (Gastric Tube) के माध्यम से सामान्य मिनरल वाटर की बोतल से पानी चढ़ाते हुए देखा जा रहा है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग (Health Department) सक्रिय हो गया है।

वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप

जानकारी के अनुसार, डिंडोरी के सिविल लाइन क्षेत्र निवासी नाबालिग सत्यम ने अज्ञात कारणों से चूहा मारने वाली जहरीली दवा का सेवन कर लिया था। परिजन उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लेकर पहुंचे, जहां उसका उपचार शुरू किया गया। इसी दौरान का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें ड्रिप स्टैंड पर मेडिकल सेलाइन (Medical Saline) या जीवनरक्षक दवा की जगह बाजार में बिकने वाली मिनरल वाटर की बोतल टंगी दिखाई दी। आरोप है कि उसी पानी का उपयोग मरीज का पेट साफ करने के लिए किया गया।

प्राथमिक उपचार के बाद मरीज की हालत में सुधार

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, प्राथमिक उपचार (Primary Treatment) के बाद नाबालिग की स्थिति में सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालांकि, उपचार की इस प्रक्रिया का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे।

CMHO और कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

मामला उजागर होने के बाद डिंडोरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज पांडे ने कहा कि मरीज का पेट साफ करने के लिए सामान्य पानी का उपयोग किया गया था, जो मेडिकल प्रोटोकॉल (Medical Protocol) के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर एवं स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, डिंडोरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उपचार में मेडिकल मानकों का पालन नहीं किया गया है, तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

डिंडोरी जिला अस्पताल पहले भी अव्यवस्था, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और लापरवाही के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में बुनियादी सुविधाओं और मानक चिकित्सा उपकरणों (Medical Equipment) की जगह कथित तौर पर जुगाड़ से उपचार किए जाने की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की साख पर फिर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। फिलहाल प्रशासनिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

Exit mobile version