भोपाल। मध्यप्रदेश भारत का पहला राज्य है, जिसने डिजिटल क्रांति के माध्यम से लोन, मुख्तयारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पावर आफ अटार्नी, पार्टनरशिप डीड जैसी 75 से अधिक सेवाओं के लिए सायबर पंजीयन प्रारंभ किया है। राज्य सरकार के इस नवाचार से पेपरलेस और कैशलेस प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिल रहा है। यह नई पीढ़ी के लिए पर्यावरण और पारदर्शिता के मामले में महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को पंजीयन भवन में सायबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ करने के बाद यह जानकारी दिए है।
धन और समय की होगी बचत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब शासन और उसके उपक्रमों के अंतरण दस्तावेज भी पेपरलेस रजिस्ट्रेशन के माध्यम से पूरे होंगे। हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण के अंतरण के लिए जनता को पंजीयन कार्यालय नहीं आना पड़ेगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वीडियो केवायसी सहित सभी कार्य होंगे, इससे धन और समय दोनों की बचत होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि संपदा 2.0 के नवाचार को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिला है। अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। राज्य सरकार ने 55 जिलों में सायबर तहसील परियोजना को लागू किया है, जिसमें राजस्व बंटवारा, नामांतरण की प्रक्रिया भी संपदा 2.0 से हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभागीय अधिकारी सायबर पंजीयन सुविधा के माध्यम से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ मौजूदा वित्त वर्ष में अपने लक्ष्य पूरे करें।
चलाया गया था पायल प्रोजेक्ट
उप मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वर्ष 2024-25 में दस्तावेजों के पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग के लिए एडवांस सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 लागू किया। इससे चल और अचल संपत्ति के दस्तावेज डिजिटल और पेपरलेस तरीके से पंजीकृत हो रहे हैं। कई दस्तावेज तो ऐसे हैं जिनके लिए उप-पंजीयक कार्यालय भी नहीं आना पड़ता है। सबसे पहले गुना,हरदा, रतलाम और डिण्डौरी जिलों में नए ई-पंजीयन और ई- स्थम्पिंग सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 का सफल पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था।
