Sonam Wangchuk on Dharmendra Pradhan’s Resignation: जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए CJP और Gen Z को बधाई दी। वहीं, अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रसेवा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया।
Sonam Wangchuk on Dharmendra Pradhan’s Resignation: देशभर में शिक्षा व्यवस्था और नीट (NEET) परीक्षा को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा (Nation First) उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और आगे भी रहेगी। उधर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि जनता की आवाज़ लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव ला सकती है।
सोनम वांगचुक ने क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह लोकतंत्र (Democracy) और प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy) की जीत है। उन्होंने कहा कि यह जीत शांति, धैर्य और दृढ़ संकल्प की बदौलत मिली है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), देश की Gen Z और उन सभी नागरिकों का आभार जताया जिन्होंने देशभर से अपनी आवाज़ बुलंद की।
इस्तीफे में युवाओं और शिक्षा सुधार का किया जिक्र
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले चार दशकों से उनका जीवन छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा है। उनका मानना है कि मजबूत और समावेशी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की नींव है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश की सेवा करने का अवसर मिला, जिसके लिए वे सदैव कृतज्ञ रहेंगे।
NEET विवाद पर दी सफाई
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि 3 मई को आयोजित NEET UG परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। मामले की जांच CBI Investigation को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।
उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से परीक्षा को CBT Mode (Computer Based Test) में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना रही।
“किसी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे”
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उनका उद्देश्य था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के कारण प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कई प्रतिभाशाली छात्रों को भी सफलता मिली। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा।
जंतर-मंतर के आंदोलन का भी किया उल्लेख
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में लिखा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी व्यथित किया। उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों का फायदा Anti-National Forces न उठा सकें और छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में न फंसे, इसी सोच के साथ उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार
अपने पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे देश, ओडिशा की जनता और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रसेवा (Public Service) ही उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है और वे आगे भी इसी भावना के साथ कार्य करते रहेंगे।
फिलहाल आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं, NEET विवाद और शिक्षा सुधार को लेकर सरकार के अगले कदमों पर भी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की निगाह बनी हुई है।

