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Dhar Bhojshala Dispute: भोजशाला विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, 14 जुलाई को होगी अहम सुनवाई, हाईकोर्ट के फैसले को तीन पक्षों ने दी चुनौती

Dhar Bhojshala Dispute: धार भोजशाला विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इंदौर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है। अब इस बहुचर्चित मामले में सर्वोच्च न्यायालय तीनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।

Dhar Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को स्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है। सुप्रीम कोर्ट इस विवाद से जुड़ी तीनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा।

हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना था हिंदू मंदिर

हाल ही में इंदौर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला को हिंदू मंदिर माना था और वर्ष के सभी 365 दिनों तक हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया था। इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

तीन पक्षों ने दाखिल की याचिका

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सबसे पहले शहर काजी की ओर से विशेष अनुमति याचिका दायर की गई। इसके बाद कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और फिर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की ओर से जिब्रान अंसारी ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। अब सर्वोच्च न्यायालय इन सभी याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई करेगा।

हिंदू पक्ष ने भी की पूरी तैयारी

दूसरी ओर, हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई के लिए तैयार है। किसी भी अंतरिम स्थगन आदेश (स्टे) से पहले अपना पक्ष रखने के उद्देश्य से पहले ही कैविएट दाखिल की जा चुकी है। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए अपना पक्ष रखेंगे।

‘सरस्वती लोक’ के रूप में होगा विकास

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने भोजशाला परिसर को ‘सरस्वती लोक’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल चुकी है। सरकार का कहना है कि परिसर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य किए जाएंगे।

मुस्लिम पक्ष ने दावों को बताया गलत

कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा है कि उनके पास ऐसे सरकारी दस्तावेज और ऐतिहासिक रिकॉर्ड हैं, जिनके आधार पर सुप्रीम कोर्ट में यह साबित किया जाएगा कि संबंधित परिसर मस्जिद है, मंदिर नहीं। उनका दावा है कि हाईकोर्ट ने जिस भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर फैसला दिया, उसी विभाग की पहले की रिपोर्टों में इस स्थल को मस्जिद बताया गया था। अब इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय की दिशा में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम मानी जा रही है।

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