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महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी बिल पेश, ‘मां के धर्म’ से तय होगा बच्चे का धर्म

महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार (Devendra Fadnavis Government) ने विधानसभा में अवैध धर्मांतरण बिल (Anti Conversion Bill) पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून के मुताबिक यदि किसी महिला का धर्म अवैध तरीके से बदला गया हो और उसके बाद वह बच्चे को जन्म देती है, तो बच्चे का धर्म वही माना जाएगा जो उसकी मां का शादी से पहले था।

अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो महाराष्ट्र (Maharashtra) इस तरह का कानून लागू करने वाला देश का 10वां राज्य बन जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस बिल का उद्देश्य कथित गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकना बताया गया है।

धर्म बदलने से पहले देनी होगी 60 दिन की सूचना

बिल में प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) को कम से कम 60 दिन पहले इसकी जानकारी देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति को अपना घोषणापत्र भी जमा करना अनिवार्य होगा।

यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन नहीं करता और अवैध धर्म परिवर्तन में शामिल पाया जाता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं बार-बार अपराध करने पर सजा बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है और जुर्माना 7 लाख रुपये तक हो सकता है।

बच्चे के अधिकारों पर भी ध्यान

प्रस्तावित कानून में ऐसे विवाहों से जन्मे बच्चों के अधिकारों को भी स्पष्ट किया गया है। बिल के अनुसार बच्चे को माता और पिता दोनों की संपत्ति में उत्तराधिकारी होने का अधिकार रहेगा।

साथ ही बच्चे के भरण-पोषण का भी प्रावधान रखा गया है। इसके तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) की धारा 144 के तहत बच्चे को मेंटेनेंस का अधिकार मिलेगा। बिल में यह भी कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों में बच्चे की कस्टडी मां के पास ही रहेगी, जब तक अदालत कोई दूसरा आदेश न दे।

SIT की सिफारिश पर तैयार हुआ कानून

बताया गया है कि कथित अवैध और सामूहिक धर्मांतरण की घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच समिति स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (Special Investigation Team) का गठन किया था। इस समिति में पुलिस महानिदेशक (Director General of Police) भी शामिल थे।

SIT ने अपनी रिपोर्ट में महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (Maharashtra Freedom of Religion Act) बनाने की सिफारिश की थी, जिसके आधार पर यह बिल तैयार किया गया।

पहले से कई राज्यों में लागू हैं ऐसे कानून

देश के कई राज्यों में पहले से ही इसी तरह के कानून लागू हैं। इनमें झारखंड (Jharkhand), उत्तराखंड (Uttarakhand), हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh), उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), गुजरात (Gujarat), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), हरियाणा (Haryana), कर्नाटक (Karnataka) और राजस्थान (Rajasthan) शामिल हैं।

अगर महाराष्ट्र विधानसभा से यह विधेयक पास हो जाता है तो राज्य भी इन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा।

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